कुल्लू अपडेट, 6 साल के बाद पुईद में अधिष्ठात्री देवी माता जगन्नाथी का काहिका उत्सव शुरू होगा। सुबह-सवेरे देव विधान के साथ देवी-देवताओं की पूजा अर्चना की जाएगी और शाम के समय माता के मंदिर में भजन कीर्तन का दौर शुरू होगा। दूसरे दिन 28 अप्रैल को ढोल-नगाड़ों और नरसिंहों की मनमोहक स्वर तरंगों के साथ माता जगन्नाथी लोअर पुईद देवलूओं के साथ परिक्रमा करेंगी। इस दौरान माता की पूजा हरियानों के द्वारा फूल और धूप से की जाएगी। इसी दिन काहिका का मंडप भी देव विधि से सजाया जाएगा। 29 अप्रैल को विश्राम का दिन होगा। काहिका उत्सव के लिए विशेष रूप से ऊझी घाटी के गांव से थान देवता का भी आगमन होगा। वहीं काहिका उत्सव में देवी-देवताओं की शक्ति का साक्षात्कार भी देखने को मिलता है। मूर्छित नड़ को देवता अपनी शक्ति से सचेत करते हैं। काहिका के दौरान होने वाली हुल्की सबके लिए आकर्षण का केंद्र रहती है। माता जगन्नाथी के कारदार चमन ठाकुर, पूर्व प्रधान उत्तम शर्मा और पुजारी सुभाष शर्मा ने कहा कि 30 अप्रैल को नड़-बदाह देवपरंपरा के साथ होगा। शाम को देव परंपरा से नड़ को जीवित करने की प्रक्रिया होगी। 1 मई को माता के सौह में कुलवी नाटी डाली जाएगी। मंदिर में देव भोज का आयोजन 2 मई को होगा। वहीं काहिका उत्सव 6 साल के बाद मनाया जा रहा है। इसके लिए तमाम तैयारियां पूरी कर दी गई है और वंही हरियानों में भी काहिका उत्सव को लेकर भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।



