कुल्लू अपडेट,इस बार दो दिन मनाई गई जन्माष्टमी। पहले दिन गृहस्थ मानते हैं और दूसरे दिन वैष्णव मानते हैं। इसी कड़ी में इस्कॉन के भक्तों ने मनाई भुंतर में वैष्णव जन्माष्टमी। इसमें जन्माष्टमी में इस्कॉन कटराईं से भगवान जग्गनाथ, बलराम और सुभद्रा विशेष रूप से पधारे थे।
जन्माष्टमी महोत्सव की शुरुआत तीन बार हरे कृष्ण महामंत्र से हुई। इसके उरान्त इस्कॉन के भक्त ईश्वर प्रभु, अभिषेक प्रभु, चंदर प्रभु, कमला माता और उर्वशी माता ने वैष्णव भजन गाकर वातावरण भक्तिमय कर दिया उन्होंने तुलसी माता का भजन, नरसिम भगवान का भजन, गौरा चांद, चैतन्य महाप्रभु और प्रभुपाद के भजन गाये। वंशिका ने नृत्य और देवांश ने मधुर भजन गया जिसे खूब सराहा गया। इसके उपरांत संगीतमय नाटक भी प्रस्तुत किया गया जिसका शीर्षक था ‘मदन मोहन’। यह भगवान मदन मोहन के प्राकट्य पर आधारित था। इसमें लगभग बीस इस्कॉन के भक्तों ने अभिनय किया।
इस मौके पर विशेष रूप से इस्कॉन हिमाचल प्रदेश के कोऑर्डिनेटर और शिक्षक गुरु श्री मान अभय राम दास पालमपुर से पधारे थे। उन्होंने बताया कि इस बार कुल्लू, मण्डी, सुंदरनगर, जोगिन्दरनगर, पालमपुर, कांगड़ा और धर्मशाला ने संयुक्त रूप से इस जन्माष्टमी महोत्सव से मनाया है।
उन्होंने कृष्ण कथा अपने मुखारविंद से श्रोताओं को सुनाई और सभी भाव विभोर हो गए। इसके उपरांत उन्होंने रिटायर्ड आई जी अतुल गौतम को सम्मानित किया उन्होने हाल ही में इस्कॉन के लिए मंदिर निर्माण के लिए भगवान जग्गनाथ को भूमि दान की है। उनके इस पूण्य कार्य के लिए उनका धन्यवाद किया गया। इसके उरान्त कृष्ण भगवान का दूध, दही, घी, शहद और जल से अभिषेक किया गया। जन्माष्टमी उत्सव में मुख्य कलाकार कुल्लू की सुप्रसिद्ध गायिका नीरू चांदनी ने एक से बढ़ के एक भजन गया कर समा बांधा। उन्होंने शयम तेरी गलियों में, जय राधा माधव जय कुंज बिहारी, तेरी बंसी रा नज़ारा कृष्णा, राधे राधे गाएंगे, राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा और हरे कृष्णा हरे कृष्णा इत्यादि भजन गा कर भक्तो और दर्शकों को बारह बजे तक नाचने को मजबूर किया। इसके उरान्त सभी भक्तों को प्रसादम ग्रहण किया। भुन्तर में मनाए इस कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में ज़िला के इस्कॉन कोऑर्डिनेटर किशोर राणा, इस्कॉन कटराईं के कोऑर्डिनेटर जितेंद्र ठाकुर, इस्कॉन मण्डी के कॉर्डिनेटर अंकुल चैतन्य के अलावा सूरज, मनु ठाकुर, संजू, चंद्र कुमार, रामपाल, आकाश, मनीष, आदित्य के अलावा लगभग 2000 हज़ार लोगों ने आनंद लिया और कृष्ण कृपा के साक्षी बने।




