कुल्लू अपडेट,लगघाटी के जिन्दी गाँव की हेम लता नें अपने बच्चे आयुष्मान के स्वस्थ होने की ख़ुशी में कहे उन्होंनें कहा कि उनके पाँच वर्षीय बच्चे आयुष्मान में पिछले कुछ समय से बहुत सी दिक्कतें सामने आई थी जैसे बातचीत करने में पिछड़ापन, पढाई में बिल्कुल भी ध्यान न देना, पढाई कि किसी भी किताब और सामग्री को पकड़नें में रूचि नहीं दिखाना, बहुत ज्यादा गुस्सा और जिद्दी पन तथा एक जगह पर नहीं बैठना आदि | ये सारी दिक्कतें पुरे परिवार के लिए एक चिंता का विषय बन चुकी हैं |जब आश बाल विकास केंद्र की सेवाओं के बारे में पता चला तो उन्होंने 23/12/2022 को पहली बार बच्चे को लाया जहाँ पर उन्होंने अपनी उपरोक्त दिक्कतों को केंद्र के ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट डॉ0 आर्य एम् के सामनें रखा जहाँ डॉ0 आर्य एम् नें आयुष्मान का 2 दिन का असेस्मेंट और ओब्जर्वेशन सत्र लिया | जिसमें उन्होंने निम्नलिखित प्रतिक्रियाओं को पहचान कर सूचीबद्ध किया
1. हाथ को बिना वजह हिलाते रहना
2. एक जगह पर बैठता नहीं
3. बातों को बार- बार रिपीट करना
4. टेकटाइल देफेंसिव (किसी भी चीज को पकड़नें से डरना और चमकने बाली चीजों से डरना)
5. ग्रेविटेशनल इन्सेकुरिटी (उंचाई से डरना)
6. चीजों को बिना मतलब से फैंकना
7. बाल काटने व सर व मुहं में क्रीम व तेल लगाने नहीं देता था |
8. स्वयं खाना नहीं खाना
9. स्वयं कपड़े नहीं पहनता
10.स्वयं टोईलेट नहीं जाता
11.दूसरों के साथ नहीं खेलना और दुसरे बच्चे को चोट पंहुचाना।ये सारी परेशानियाँ आयुष्मान के माता-पिता के परिवार में बड़े झटके से कम नहीं था उसके बाद डॉ0 आर्य एम नें आयुष्मान के केस को निदेशक डॉ0 श्रुति भारद्वाज से चर्चा में लाया,वहां से निष्कर्ष निकला कि बच्चे को किस तरह से थैरेपी योजना बनानी है |
पूरा केस जांचने के बाद डॉ0 आर्य एम नें आयुष्मान को 26 दिसंबर से थैरेपी सत्र शुरू करने के लिए कहा और उसके बाद
आयुष्मान को पहली बार 26/12/2022 से थैरेपी देना आरम्भ कर दिया गया शुरू में जब आयुष्मान नया- नया केंद्र आया था तो इसके बैठने की क्षमता के हिसाब से एक ही सत्र दिया जाता था लेकिन धीरे धीरे जब आयुष्मान के व्यवहार में बदलाव आया तो दिन में 3-3 सत्र दिए जाने लगे |
17 अप्रैल 2023 के आते- आते तक लघभग चार महीने की थैरेपी सेवाओं से आज आयुष्मान के जीवन में बहुत सकारात्मक बदलाव हुयें हैं | अब आयुष्मान सभी समस्याओं से बहार आ गया है और स्वयं से अपने बेसिक काम जैसे खाना खाना,कपड़े पहनना,टॉयलेट जाना,बातचीत शुरू कर दिया,अब बातें दोहराना बहुत कम कर दिया है,उंचाई से बिल्कुल दर नहीं हैं,अब पढाई लिखाई में अच्छा ध्यान देता हैं ,अब किसी भी चीज से नहीं डरता | सम्फिया फाउंडेशन के निदेशक डॉ0 श्रुति भारद्वाज नें बताया कि इस तरह की सफलता कहानी सबके सामने इसलिए लाई जा रही ताकि आम जनों को थैरेपी सेवाओं के लाभ के बारे में पता चल सके ताकि बच्चों को जल्दी ही सेवाएँ मिले और वे अपने जीवन को सही से जी सके |



