Search
Close this search box.

आइये जाने नवरात्री के दूसरे दिन पूजी जाने वाली माता ब्रह्मचारिणी के बारे में

आस्था अपडेट ,नवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान,शक्ति देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्रि वर्ष में चार बार आता है। माघ, चैत्र, आषाढ,अश्विन मास नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है जिसे पूरे भारत में महान उत्साह के साथ मनाया जाता है। नवरात्रि मुख रूप से साल में 2 बार मनाया जाता है एक चैत्र मास में और दूसरी अश्विन मास पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि हर साल अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से सुरु होती है और दशमी तिथि को मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के साथ समाप्त होती है।

मां ब्रह्मचारिणी देवी पार्वती का अविवाहित रूप हैं। इस अवतार में उन्होंने दक्ष प्रजापति के घर जन्म लिया और महान सती थीं। वह सभी भाग्य के प्रदाता, भगवान मंगल को नियंत्रित करती है। वह नंगे पैर चलती हैं, उनके दो हाथ हैं और वे दाहिने हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल रखती हैं। माँ दुर्गाजी का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता। माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन इन्हीं के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में शिथिल होता है। इस चक्र में अवस्थित मनवाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है। इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है कि जिनका विवाह तय हो गया है लेकिन अभी शादी नहीं हुई है। इन्हें अपने घर बुलाकर पूजन के पश्चात भोजन कराकर वस्त्र, पात्र आदि भेंट किए जाते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी पूजा मुहूर्त – 16 अक्टूबर 2023
अश्विन शुक्ल द्वितीया तिथि शुरू – 16 अक्टूबर 2023, प्रात: 12.32
अश्विन शुक्ल द्वितीया तिथि समाप्त – 17 अक्टूबर 2023, प्रात: 01.13

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि :- शास्त्रों में बताया गया है इस अवतार में माता एक महान सती थीं. महर्षि नारद के कहने पर अपने जीवन में भगवान महादेव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. इस दिन उनके अविवाहित रूप की पूजा की जाती है. नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में ऐसे वस्त्र पहनें जिसमें सफेद और लाल रंग का मिश्रण हों. सफेद रंग का कमल चढ़ाएं, इस दौरान ह्रीं का जाप करें. माता की कथा पढ़े और अंत में आरती कर दें. मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग शक्कर और पंचामृत है.

मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र :-
ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दधाना कपाभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।

Kullu Update
Author: Kullu Update

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज