आस्था अपडेट , ,नवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान,शक्ति देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्रि वर्ष में चार बार आता है। माघ, चैत्र, आषाढ,अश्विन मास नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है जिसे पूरे भारत में महान उत्साह के साथ मनाया जाता है। नवरात्रि मुख रूप से साल में 2 बार मनाया जाता है एक चैत्र मास में और दूसरी अश्विन मास पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि हर साल अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से सुरु होती है और दशमी तिथि को मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के साथ समाप्त होती है।
माता चंद्रघंटा :- मां दुर्गा के भक्त नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं। नौ दिवसीय उत्सव 15 अक्टूबर को शुरू हुआ और 24 अक्टूबर को समाप्त होगा। हिंदू हर साल चार नवरात्रि मनाते हैं, और जो अश्विन के चंद्र माह में शरद ऋतु में आती है वह शारदीय नवरात्रि है। इस दौरान लोग मां दुर्गा और उनके नौ रूपों नवदुर्गाओं की पूजा करते हैं। वे हैं मां शैलपुत्री, मां चंद्रघंटा, मां कुष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री। अगर आप और आपके प्रियजन इस साल त्योहार मना रहे हैं और नवरात्रि के व्रत रख रहे हैं, तो आपको मां चंद्रघंटा के बारे में जानना चाहिए। माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है। इस दिन साधक का मन ‘मणिपूर’ चक्र में प्रविष्ट होता है। लोकवेद के अनुसार माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। ये क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं।
स्वरूप
माँ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है।
कैसे करें मां चंद्रघंटा की पूजा :- सुबह स्नान के बाद मां चंद्रघंटा की पूजा करें। सबसे पहले उन्हें अक्षत, सिन्दूर, कुमकुम, फूल, माला, धूप, दीप, नैवेद्य, फल आदि चढ़ाएं। इस दौरान पूजा मंत्र का जाप करें. इसके बाद मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं. आप चाहें तो खीर का भोग भी लगा सकते हैं. मां चंद्रघंटा की पूजा करने से शुक्र ग्रह के बुरे प्रभाव दूर होते हैं।
पूजा के लिए सर्वोत्तम समय :- पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि 23 मार्च गुरुवार को शाम 06:20 बजे शुरू हुई और 24 मार्च शुक्रवार शाम 04:59 बजे तक रहेगी. आज सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06 बजकर 21 मिनट से दोपहर 01 बजकर 22 मिनट तक है. रवि योग दोपहर 01:22 बजे से अगले दिन सुबह 06:20 बजे तक है.
मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व:-
. मां चंद्रघंटा के आशीर्वाद से वैवाहिक जीवन बेहतर होता है और परेशानियां दूर हो जाती हैं।
. जिन लोगों के विवाह में किसी कारणवश देरी हो रही हो उन्हें मां चंद्रघंटा की पूजा करनी चाहिए। जल्द ही शादी के योग बन सकते हैं.
. मां चंद्रघंटा की कृपा से पापों का नाश होता है। साहस एवं पराक्रम में वृद्धि होगी। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.
. मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए मां चंद्रघंटा की पूजा करें। यह देवी मोक्ष भी प्रदान करती हैं।




