कुल्लू अपडेट,16 अक्टूबर से मनाए जा रहे विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर एशिया में जलवायु और पर्यावरण सचेतकों ने वैश्विक खाद्य और जलवायु संकट का समाधान करने के लिए सरकारों से मांग करने के लिए गत दिनों 7 देशों में प्रदर्शन किए। भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, थाईलैंड, इंडोनेशिया और फिलिपींस में आयोजित प्रदर्शन और कार्यशालाएं खाद्य और जलवायु के मुद्दे पर काम करने का हिस्सा है और इन्हें विश्व खाद्य दिवस और वर्ल्ड फूड फोरम के जश्न के साथ बनाया गया है। यह कार्यक्रम 16-20 अक्टूबर को रोम, इटली के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के मुख्यालय में भी मनाया जा रहा है।
वीरवार को अम्बेडकर भवन बंजार में हिमालय नीति अभियान सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी ने स्थानीय ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधिओं और महिला मंडलों के साथ भोजन एवं जलवायु परिवर्तन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। हिमालय नीति अभियान संस्था के राष्ट्रीय संयोजक गुमान सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि निर्यात- निर्देशित कृषि मॉडल के खिलाफ होते हुए संगठनों ने सरकारों से मांग की है कि उन्हें जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बावजूद आपसी असमानताओं के बीच खाद्य के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
इन्होंने बताया कि हम सतत खाद्य प्रणालियों की मांग करते हैं जो घरेलू खाद्य की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देती हैं और सभी के लिए पर्याप्त और पौष्टिक खाद्य सुनिश्चित करती हो।
एफएओ के अनुसार दुनिया के उपभोजन करने वाले लोगों का अधिकांश भाग एशिया में रहता है, जिसमें 42 मिलियन या अपभोजन करने वाले ग्लोबल आबादी का 55% है। खाद्य, ईंधन, उर्वरक और ऊर्जा के वैश्विक मूल्य वृद्धि के आलोक में खाद्य आपूर्ति के झटकों और वैश्विक मूल्य वृद्धि के प्रभाव के दर्दनाक प्रभाव सारी दुनिया में महसूस होते हैं। लेकिन अधिकतर एशिया में, दुनिया बाजार के अधिक निर्भरता और कम आय वाले घरों का अधिकांश होने के कारण, खासकर महसूस किए जाते हैं।
पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंट के संदीप मिन्हास ने कहा है कि एफएओ की एक नई विश्लेषण के अनुसार दुनिया के करोड़ों लोगों को स्वस्थ आहार की मांग पुरी नहीं कर सकते हैं। स्वस्थ आहार की लागत में सबसे अधिक वृद्धि और इस की लागत की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि एशिया में हो रही है। अब एशिया में 78 मिलियन और लोग स्वस्थ आहार की लागत नहीं उठा सकते क्योंकि यह 4% महंगा हो गया है। इन्होंने बताया कि भारत में हिमाचल प्रदेश जिला कुल्लू के बंजार में विभिन्न संबंधित संगठनों के साथ एक दिन की कार्यशाला आयोजित की गई है। इसके पीछे एक आपदात्मक जलवायु आपदा है और भविष्य के खाद्य मुद्दे को संज्ञान में लाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर इंस्टिट्यूट फॉर सोशल डेमोक्रेसी से तेज सिंह ठाकुर, बैक ऑफ बेसिक्स संस्था से राहुल सक्सेना, जागोरी संस्था से आभा भैया, रिजेनरेटिव संस्था बिहार से इश्तियाक अहमद, प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक ठाकुर दास, सहारा संस्था के निदेशक राजेन्द्र चौहान और विभिन्न ग्राम पंचायतों से आए जनप्रतिनिधि एवं महिला मंडलों की पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।




