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सनातन धर्म – उत्पत्ति और मूल सिद्धांत 

कुल्लू अपडेट, सनातन धर्म जिसका अन्य नाम हिंदू धर्म भी है इसे वैदिक धर्म भी कहा जाता है। भारत और सिंधु घाटी सभ्यता जोकि अब पाकिस्तानी क्षेत्र में है, इसमें हिंदू धर्म के कई चिन्ह मिलते हैं जैसे कि मातृ देवी की मूर्तियां, शिव पशुपति जैसे दिखने वाले देवता, शिवलिंग, पीपल की पूजा,स्वास्तिक चिन्ह आदि। प्राचीन काल में सनातन धर्म कुछ संप्रदायों में बंटा था जो अलग-अलग देवों की पूजा किया करते थे। हर संप्रदाय के समर्थक अपने देवता को दूसरे संप्रदाय के देवता से बड़ा समझते थे। इस कारण से उनमें हमेशा द्वेष भाव बना रहता था। एकता बनाए रखने के लिए धर्मगुरुओं ने लोगों को यह शिक्षा दी कि सभी देवता समान है और एक दूसरे के भक्त भी है। इससे सभी संप्रदायों के लोगों का आपस में मेल हो गया और सनातन धर्म की उत्पत्ति हुई। सनातन धर्म का सारा साहित्य, वेद, पुराण, श्रुति, स्मृतियां, उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता, आदि जितने भी धर्म ग्रंथ है संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं। एक समय ऐसा भी आया जब भारत पर बाहरी आक्रांताओं का शासन हो गया और इसके कारण देवभाषा संस्कृत का पतन होने लगा और सनातन धर्म की जड़ें कमज़ोर होने लगी हिंदू धर्म केमुख्य सिद्धांत के कुछ बिंदु है –
1. ईश्वर एक नाम अनेक.
2. ब्रह्म या परम तत्त्व सर्वव्यापी है।
3. ईश्वर से डरें नहीं, प्रेम करें और प्रेरणा लें.
4. हिन्दुत्व का लक्ष्य स्वर्ग-नरक से ऊपर.
5. हिन्दुओं में कोई एक पैगम्बर नहीं है।
6. धर्म की रक्षा के लिए ईश्वर बार-बार पैदा होते हैं।
7. परोपकार पुण्य है, दूसरों को कष्ट देना पाप है।
8. जीवमात्र की सेवा ही परमात्मा की सेवा है।
9. स्त्री आदरणीय है।
10. सती का अर्थ पति के प्रति सत्यनिष्ठा है।
11. हिन्दुत्व का वास हिन्दू के मन, संस्कार और परम्पराओं में.
12. पर्यावरण की रक्षा को उच्च प्राथमिकता.
13. हिन्दू दृष्टि समतावादी एवं समन्वयवादी.
14. आत्मा अजर-अमर है।
15. सबसे बड़ा मंत्र गायत्री मंत्र.
16. हिन्दुओं के पर्व और त्योहार खुशियों से जुड़े हैं।
17. हिन्दुत्व का लक्ष्य पुरुषार्थ है और मध्य मार्ग को सर्वोत्तम       माना गया है।
18. हिन्दुत्व एकत्व का दर्शन है।

Kullu Update
Author: Kullu Update

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