आस्था अपडेट , इस साल 12 नवंबर को दिवाली है। दिवाली की रात लक्ष्मी-गणेश की पूजा का सबसे अधिक महत्व होता है। मान्यता है कि दिवाली के दिन यदि आप सच्चे मन से पूजा करते हैं, तो धन की देवी लक्ष्मी और बुद्धि के देवता गणेश आपसे प्रसन्न रहेंगे। दिवाली की रात शुभ मुहूर्त में पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशियां आती हैं। इसके लिए सबसे जरूरी है कि आपके पास पूजन की सभी सामग्री मौजूद हों। दिवाली की पूजा के समय किसी तरह की भूल-चूक न हो इसके लिए पहले से ही पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट तैयार कर लें। ऐसा करने से पूजा के समय गलती की संभावना नहीं रहती है और विधि-विधान से पूजा संपन्न हो जाती है। जल्द ही दिवाली आने वाली है और अगर आपने भी अभी तक पूजन सामग्री नहीं जुटाई है तो यहां से नोट कर लें।
दिवाली पूजा की आवश्यक सामग्री
लकड़ी की चौकी
चौकी को ढकने के लिए लाल या पीला वस्त्र
देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां/चित्र
कुमकुम
चंदन
हल्दी
रोली
अक्षत
पान और सुपारी
साबुत नारियल अपनी भूसी के साथ
अगरबत्ती
दीपक के लिए घी
पीतल का दीपक या मिट्टी का दीपक
कपास की बत्ती
पंचामृत
गंगाजल
पुष्प
फल
कलश
जल
आम के पत्ते
कपूर
कलावा
साबुत गेहूं के दाने
दूर्वा घास
जनेऊ
धूप
एक छोटी झाड़ू
दक्षिणा (नोट और सिक्के)
आरती की थाली
लक्ष्मी-गणेश पूजन विधि
दिवाली की सफाई के बाद घर के हर कोने को साफ करके गंगाजल छिड़कें।
लकड़ी की चौकी पर लाल सूती कपड़ा बिछाएं और बीच में मुट्ठी भर अनाज रखें।
कलश को अनाज के बीच में रखें।
कलश में पानी भरकर एक सुपारी, गेंदे का फूल, एक सिक्का और कुछ चावल के दाने डालें।
कलश पर 5 आम के पत्ते गोलाकार आकार में रखें।
बीच में देवी लक्ष्मी की मूर्ति और कलश के दाहिनी ओर भगवान गणेश की मूर्ति रखें।
एक छोटी-सी थाली में चावल के दानों का एक छोटा सा पहाड़ बनाएं, हल्दी से कमल का फूल बनाएं, कुछ सिक्के डालें और मूर्ति के सामने रखें दें।
इसके बाद अपने व्यापार/लेखा पुस्तक और अन्य धन/व्यवसाय से संबंधित वस्तुओं को मूर्ति के सामने रखें।
अब देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश को तिलक करें और दीपक जलाएं। इसके साथ ही कलश पर भी तिलक लगाएं।
अब भगवान गणेश और लक्ष्मी को फूल चढ़ाएं। इसके बाद पूजा के लिए अपनी हथेली में कुछ फूल रखें।
अपनी आंखें बंद करें और दिवाली पूजा मंत्र का पाठ करें।
हथेली में रखे फूल को भगवान गणेश और लक्ष्मी जी को चढ़ाएं।
लक्ष्मीजी की मूर्ति लें और उसे पानी से स्नान कराएं और उसके बाद पंचामृत से स्नान कराएं।
मूर्ति को फिर से पानी से स्नान कराकर, एक साफ कपड़े से पोछें और वापस रख दें।
मूर्ति पर हल्दी, कुमकुम और चावल डालें। माला को देवी के गले में डालकर अगरबत्ती जलाएं।
नारियल, सुपारी, पान का पत्ता माता को अर्पित करें।
देवी की मूर्ति के सामने कुछ फूल और सिक्के रखें।
थाली में दीया लें, पूजा की घंटी बजाएं और लक्ष्मी जी की आरती करें




