Search
Close this search box.

मंगलवार का महत्त्व और हनुमान जी की पूजा 

कुल्लू अपडेट, वैसे तो किसी भी दिन किसी भगवान का पूजा कर सकते है लेकिन सभी भगवान के लिए अलग अलग दिन समर्पित किए गए है और उसके पीछे एक जरूरी कारण है। हिन्दू धर्म में सप्ताह के हर दिन का विशेष महत्त्व है। प्रत्येक दिन किसी ना किसी भगवान को समर्पित है। सोमवार शिवजी को, बुधवार गणेश जी को, वीरवार के दिन विष्णु भगवान को, शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को, शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है और मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है। कई बार दिमाग में यह सवाल आता है कि आखिर मंगलवार ही क्यों हनुमान जी का दिन विशेष है और इसी दिन क्यों उनकी पूजा होती है. शास्त्रों के मुताबिक हनुमान जी को मंगल ग्रह का नियंत्रक भी कहा जाता है। इनकी पूजा-अर्चना से मात्र सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और जो कोई भी भक्त इनकी सच्चे मन से पाठ करता है वो हर किसी मुसीबत से सुरक्षित हो जाता है। बता दें कि, मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा से आत्मविश्वास, साहस और शक्ति का वरदान प्राप्त होता है। स्कंद पुराण के अनुसार मंगलवार के दिन ही हनुमानजी का जन्म हुआ था। इसी वजह से यह दिन उनकी पूजा के लिए समर्पित कर दिया गया। 
इस दिन बजरंगबली की पूजा की जाती है और उनका व्रत किया जाता है। मंगलवार के दिन बहुत सारे लोग मंदिर और अपने घरों में सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ भी करते है। अब सवाल यह है कि आखिर मंगलवार के ही दिन हनुमानजी की पूजा क्यों होती है? दरअसल मंगलवार को हनुमान जी की पूजा कोई सौ या दो सौ साल से नहीं हो रही है यह हजारों सालों से होती चली आ रही है। स्कंद पुराण के अनुसार मंगलवार को ही हनुमान जी का जन्म हुआ था जिसके आधार पर ही मंगलवार को उनकी पूजा की जाती है। मंगलवार को बजरंग बली की पूजा करने से वह जल्दी प्रसन्न होते है और आप की मनोकामना पूरी होती है। ऐसा भी कहा जाता है कि बजरंग बली के भक्तों को कभी कष्ट नहीं होता है वह सब प्रकार के दुख हर लेते है इसलिए ही उनका नाम संकटमोचन रखा गया है।
अगर मंगलवार के दिन आप व्रत रखते है तो आप को सुबह में हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए और शाम को सुंदरकांड करना चाहिए। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष है उन्हें हनुमान जी का व्रत रखना चाहिए। शनिवार को भी हनुमान जी की पूजा होती है इसको लेकर मान्यता है कि बजरंगबली ने शनिदेव के कष्टों को दूर किया था। जिसके बाद से शनिदेव ने वचन दिया था कि जब शनिवार को कोई बजरंगबली की पूजा करेगा तो उस पर शनिदेव की कुदृष्टि कभी नहीं पड़ेगी तभी से शनिवार को भी बजरंगबली की पूजा होने लगी।

Kullu Update
Author: Kullu Update

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज