आस्था अपडेट , प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस समय मार्गशीर्ष माह चल रहा है और इस माह की विनायक चतुर्थी 16 दिसंबर को है। यह इस वर्ष की आखिरी विनायक चतुर्थी होगी। चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान से गौरी पुत्र गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। गणेश जी सभी देवताओं में प्रथम पूज्य हैं और शुभता के भी प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गणपति बप्पा की पूजा करने और व्रत रखने से ज्ञान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। ऐसे में चलिए जानते हैं साल के आखिरी विनायक चतुर्थी की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में
मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी 2023 तिथि :- पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 15 दिसंबर 2023 को रात 10 बजकर 30 मिनट से हो रही है। अगले दिन 16 दिसंबर 2023 को रात 08 बजे इस तिथि का समापन होगा। उदया तिथि के अनुसार 16 दिसंबर 2023 विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।
गणेश पूजा का समय – सुबह 11 बजकर 14 मिनट से दोपहर 13 बजकर 18 मिनट तक
विनायक चतुर्थी पूजा विधि :- विनायक चतुर्थी के दिन सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहन लें और गणेश जी के सामने प्रार्थना करते हुए पूजन का संकल्प लें। गणेश जी की मूर्ति एक चौकी पर स्थापित करें और उनका जलाभिषेक करें।
भगवान गणेश को चंदन का तिलक लगाएं, वस्त्र, कुमकुम, धूप, दीप, लाल फूल अक्षत, पान, सुपारी आदि अर्पित करें।
कहा जाता है कि गणेश जी को मोदक और दूर्वा घास बेहद पसंद है। ऐसे में उनकी कृपा पाने के लिए विनायक चतुर्थी के दिन मोदक या लड्डू का भोग जरूर लगाएं और दूर्वा जरूर चढ़ाएं।
सिंदूर का तिलक जरूर लगाएं :- गणेश जी को सिंदूर बेहद प्रिय है, इसलिए विनायक चतुर्थी के दिन पूजा करते समय गणेश जी को लाल रंग के सिंदूर का तिलक लगाएं। साथ ही सिंदूर चढ़ाते समय नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें-
“सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्।
शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥ “




