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शुक्रवार माता लक्ष्मी का दिन है ओज, तेजस्विता, शौर्य, सौन्दर्यवर्धक

कुल्लू अपडेट, सनातन धर्म में हर दिन किसी ना किसी देवी-देवता का होता है। ग्रहों के आधार पर सप्ताह के सातों दिनों का नामकरण किया गया है। सात दिन विभिन्न देवताओं को समर्पित हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर एक दिन किसी न किसी ग्रह के लिए होता है और इसी के अनुसार देवताओं की पूजा की जाए तो भगवान की कृपा हमेशा बनी रहती है। अगर आप भी चाहते हैं कि आपके जीवन में भगवान की कृपा बनी रहे, तो आपको पता होना चाहिए कि सप्ताह का कौन सा दिन किसी देवी-देवता को समर्पित है और उस दिन किसी न किसी भगवान की पूजा अवश्य की जाती है। जिसके मुताबिक शुक्रवार का दिन संतोषी मां,मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन मां लक्ष्मी के साथ मां दुर्गा की पूजा की जाती है। शुक्रवार के दिन जो भक्त मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उन्हें संसार के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में लक्ष्मी मां को धन की देवी मानी गई हैं। मान्यता है कि शुक्रवार के दिन उनकी भलीभांति पूजा आराधना करने से उनका आशीर्वाद बना रहता है। इस दिन पूजा करना शुभ होता है और धन-धान्य से भरपूर होता है। इसके साथ ही शुक्र ग्रह को भौतिक सुखों का कारक भी माना जाता है। यह दिन ओज, तेजस्विता, शौर्य, सौन्दर्यवर्धक और शुक्रवर्धक होता है।
शुक्रवार को सुख और समृद्धि के लिए देवी लक्ष्मी का भी व्रत रखा जाता है। इसे वैभवलक्ष्मी व्रत भी कहा जाता है। इस दिन स्त्री-पुरुष देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हुए श्वेत पुष्प, श्वेत चंदन से पूजा कर तथा चावल और खीर से भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस व्रत के दिन उपासक को एक समय भोजन करते हुए खीर अवश्य खानी चाहिए।

Kullu Update
Author: Kullu Update

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