कुल्लू अपडेट,जिला कुल्लू के उप मण्डल बंजार में पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंटट, हिमालय नीति अभियान व सहारा संस्था के संयुक्त तत्वावधान से हम और हमारा परिवेश के तहत चिड़िया बोलती है विषय पर बंजार क्षेत्र के युवक और युवतियों के लिए दो दिवसीय निशुल्क आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। बंजार स्थित द ब्ल्यू शीप हॉस्टल तीर्थन में हुई इस कार्यशाला का आज समापन हुआ है जिसमें करीब 52 स्थानीय प्रतिभागिओं ने हिस्सा है।
इस दो दिवसीय आवासीय कार्यशाला में हम और हमारा परिवेश के तहत चिड़िया बोलती है विषय पर बिभिन्न क्षेत्र से आए विशेषज्ञों ने स्थानीय प्रतिभागियों के साथ अपने विचार और अनुभव साझा किए। इस दौरान परिचय सत्र के पश्चात प्रतिभागियों के पांच अलग अलग ग्रुप बनाए गए और हर ग्रुप को आपस में विचार विचार विमर्श हेतु संस्कृति, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क, तीर्थन नदी, पर्यटन और आजीविका जैसे अलग अलग टॉपिक दिए गए। हर ग्रुप द्वारा दिए हुए विषय पर सबके समक्ष अपनी प्रस्तुति दी गई और हर टॉपिक पर विस्तृत से व्याखान किया गया।
हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ठाकुर द्वारा प्रतिभागियों को बंजार क्षेत्र के इतिहास, यहां पर हुए सामाजिक आंदोलनों और तीर्थन घाटी को पर्यटन हेतु संरक्षित करने के लिए किए गए संघर्ष बारे विस्तृत जानकारी दी गई। इन्होंने बताया कि स्वर्गीय दिले राम शबाब के नेतृत्व में तीर्थन नदी को परियोजना से मुक्त रखने के लिए यहां के लोगों ने संघर्ष किया है जिस कारण इस नदी ट्राउट मछली मौजूद है। यहां पर स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क और स्वच्छ वातावरण देसी विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है। इन्होंने हिमालय क्षेत्र में हो रहे जलवायु परिवर्तन और इससे पड़ने वाले प्रभाव पर अपनी चिंता जाहिर की है। इन्होंने बताया कि गोलबल वार्मिंग की वजह से पर्यावरण बदल रहा है जिस कारण, समय पर बारिश और वर्फबारी न होना, अत्यधिक बारिश होना, बाढ़, जलजला, आगजनी जैसी घटनाएं देखने को मिल रही है। इन्होने बताया कि राज्य को पर्यावरण संरक्षण के प्रति कठोर कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली से सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ वरयाम सिंह ने हम और हमारा पर्यावरण विषय पर अपने विचार साझा किए।
इन्होंने बताया कि हमारे परिवेश के आसपास मौजुद नदियां, पहाड़, झरने, जलस्रोत, जंगल, मिट्टी, समुद्र आदि ही पर्यावरण है और पृथ्वी पर मौजुद अन्य प्राणियों की तरह हम सब भी इसका एक अंश है। इन्होंने बताया कि मनुष्य अपने आप को अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ मानता है जबकि प्रकृति ने सभी को एक समान बनाया है। इनका कहना है कि सभी मनुष्य अपने आप को पहचान कर इस धरती का नागरिक समझे क्योंकि प्रकृति के लिए धरती पर मौजुद सभी प्राणी एक समान है।
इंस्टीट्यूट फॉर सोशल डेमोक्रेसी के प्रशिक्षक तेज सिंह ठाकुर ने प्रीतिभागियों को प्रकृति से मिली सदियों पुरानी सांझी विरासतों के बारे प्रतिभागियों का ज्ञानवर्धन किया। इन्होंने बताया कि जुआरी प्रथा, पुराना पहनावा पट्टू , पुलें, मोटा अनाज, बोली भाषा, नृत्य, खानपान, बैल हल, घराट आदि कई सांझी विरासतें हमें पीढ़ी दर पीढ़ी अपने वजुर्गों से मिलती आ रही जो कई स्थानों पर अभी भी प्रचलन में है लेकिन कई स्थानों पर इन सांझी विरासतों के वजूद को खतरा है।
सहारा संस्था के निदेशक राजेन्द्र चौहान ने वन अधिकार कानून 2006 के क्रियान्वन लेकर अपने विचार साझा किए। इन्होंने बताया कि इस कानून के लागू होने से वन क्षेत्र और इसके आसपास रहने वाले समुदाय को उनके पुश्तैनी अधिकार मिलेंगे। इन्होने प्रतिभागियों को वन अधिकार कानून के तहत पेश किए जाने वाले दावों की प्रक्रिया भी बताई।
इस दौरान पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंट ट्रस्ट के शोध्यार्थी अविनाश, विवेक नेगी, ललिता, डॉक्टर देव ने भी प्रतिभागियों से अपने अपने विचार साझा किए। आईआईटी मंडी से आए प्रोफेसर नीलांबर छेत्री द्वारा हिमालय क्षेत्र की जातीय और सांस्कृतिक वयवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
हिमालय नीति अभियान के महासचिव संदीप मिन्हास ने जानकारी देते हुए बताया कि हम और हमारा परिवेश की यह पहली कार्यशाला है। जिसमें चिड़िया बोलती है विषय पर बंजार क्षेत्र से तीर्थन घाटी, जीभि घाटी और सैंज घाटी के करीब 52 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है। इन्होंने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य हम और हमारा परिवेश के तहत चिड़िया बोलती है की थीम पर हिमालय से जुड़े हुए सामाजिक, सांस्कृतिक, पर्यटन, पर्यावरण और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा परिचर्चा करना है। इस कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों ने स्थानीय प्रतिभागियों के साथ अपने अपने विचार और अनुभव साझा किए। इस दौरान रात को स्क्रीन पर टर्फ युद्ध डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई जिसे युवाओं द्वारा काफी पसन्द किया गया है। इन्होंने इस आवासीय कार्यशाला में उपस्थित आने के लिए सभी का आभार जताया है और कहा कि भविष्य में स्कूल और कॉलेज के छात्र छात्राओं के लिए भी इस प्रकार की कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।




