आस्था अपडेट ,11 अप्रैल को नवरात्रि का तीसरा दिन है। नौ दिनों की दुर्गा पूजा में नवरात्रि के तीसरे दिन की पूजा का अत्याधिक महत्व हैं। देवी दुर्गाजी की तीसरे स्वरूप का नाम चंद्रघंटा हैं, नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-अर्चन किया जाता है। देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां दुर्गा का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घण्टे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण देवी का नाम चंद्रघण्टा पड़ा है।
चंद्रघंटा की पूजा का महत्व :- मां चंद्रघंटा का ध्यान धारण करने से भक्तों को सांत्वना, सुख और शांति की प्राप्ति होती हैऔर इनकी पूजा से भक्तों को आत्मिक उन्नति और समृद्धि की प्राप्ति भी होती है। इनकी उपासना से भक्तगण समस्त सांसारिक कष्टों से छूटकर सहज ही परमपद के अधिकारी बन जाते हैं। इनका वाहन सिंह है अतः इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है। इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की प्रेत-बाधादि से रक्षा करती है।
पूजाविधि :- इस दिन मां को शुद्ध जल और पंचामृत से स्नान कराएं।अलग-अलग तरह के सुगंधित फूल,अक्षत, कुमकुम, सिन्दूर,बेलपत्र,चन्दन आदि अर्पित करें। केसर-दूध से बनी मिठाइयों या खीर का भोग लगाएं। मां को सफेद कमल, लाल गुडहल और गुलाब की माला अर्पण करें और प्रार्थना करते हुए ‘ॐ देवी चन्द्रघंटाय नमः’ मंत्र जप करें।पूजा के अंत में माँ चंद्रघंटा की आरती करें।




