कुल्लू अपडेट , रियाड़ा गांव के 72 वर्षीय दिव्यांग हुकमाराम के परिवार की स्थिति इतनी दयनीय है, कि दो वक्त की रोटी के लिए भी दूसरों के ऊपर मोहताज है। परिवार में तीन सदस्य हैं तीनों की दिव्यांग है एक इनकी पत्नी मणि देवी दोनों आंखों से दृष्टिहीन है। ऊपर से बेटा जगतराम भी अपने हाथों और पैरों से लाचार है। गांव में कोई खास रोजगार का कोई साधन नहीं है। पेंशन से परिवार अपना गुजारा करता है। 100 साल से पुराना पुश्तैनी मकान है, जिसमें यह परिवार अपना गुजर-बसर कर रहे हैं। छत पुरानी होने के कारण बारिश के दिनों में कभी पानी अंदर आ जाता है, हालांकि गांव के बुद्धिजीवी लोग समय-समय पर उनकी मदद करते हैं लेकिन फिर भी कहीं ना कहीं कई चीजों की कमियां रह जाती है। गांव के किसी वृद्ध व्यक्ति द्वारा इस परिवार की जानकारी फोन के माध्यम से कार सेवा दल कार्यालय को दी गई और बताया गया कि परिवार में इस वक्त राशन, बिस्तर, बर्तन की सख्त आवश्यकता है। जितना जल्दी हो सके संस्था द्वारा उनकी मदद की जाए। कार्यालय में फोन के माध्यम से दी गई जानकारी के पश्चात संस्था के सेवादारों द्वारा परिवार की मदद करने की प्रक्रिया को शुरू किया गया और समान इकट्ठा करके परिवार को गांव वासियों की मदद से उनके गांव रियाड़ा पहुंचा कर दिया गया।
संस्था के माध्यम से आगे जब भी हुकमराम को कोई भी सामान या अन्य किसी की आवश्यकता होगी संस्था समय-समय पर मदद के लिए तैयार रहेगी।
Author: Kullu Update
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