कुल्लू अपडेट ,46वां सूत्रधार वर्षगांठ उत्सव 19 से 21 जून तक कुल्लू के ऐतिहासिक लाल चन्द प्रार्थी कलाकेन्द्र में प्रतिदिन सायं 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक मनाया जा रहा है, जिसमें लोकनृत्य, समूह नृत्य, प्रिंसेस सूत्रधार, लोकगीत व फिल्म गीत की प्रतियोगिताएं हो रही है तथा 19 व 20 जून को देवसदन में सुबह 10:30 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक नाटक प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है | इस त्रिदिवसीय उत्सव में 28 निजी व सरकारी विद्यालयों के 1000 से अधिक स्कूली छात्र-छात्राएं अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे है | इस उत्सव के द्वितीय दिवस पर देवसदन कुल्लू के सभागार में आयोजित हो रही लघुनाटक प्रतियोगिता में अकादमिक हिल्स पब्लिक स्कूल वर्कशॉप शमशी, अरुणोदय व.मा.पा. मौहल, डेल्ही पब्लिक स्कूल मनाली, भारत भारती व.मा.पा. ढालपुर कुल्लू, कैंब्रिज इन्टरनेशनल स्कूल मौहल, ट्रिनिटी स्कूल मौहल, कुल्लू साइंस स्कूल ऑफ़ एजुकेशन बाशिंग तथा साईं स्टार व.मा.पा. ढालपुर कुल्लू ने भाग लिया | इस अवसर पर समाज सेवी, चेयरमैन ए०सी० सोहन कुल्लू सिटी एवं सुभाष इलेक्ट्रिकल कुल्लू सुभाष शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की | संस्था अध्यक्ष दिनेश सेन द्वारा मुख्यातिथि को कुल्लवी परम्परा अनुसार शाल, टोपी व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया | इस उत्सव में चन्द्रमोहन कपूर, राजेन्द्र प्रसाद शर्मा तथा राजेश शर्मा राजा ने निर्णायक मण्डल की भूमिका अदा कर रहे है | इस मौके पर संस्था अध्यक्ष दिनेश सेन सहित उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह, महासचिव अतुल गुप्ता, वित्त सचिव जोगिन्द्र ठाकुर, भण्डार प्रभारी तिलक राज, सचिव हितेश गोगी, कार्यकारणी सदस्य भारत भूषण आचार्य, विशेष आमंत्रित सदस्य सुंदर श्याम, आमंत्रित सदस्य सन्नी इत्यादि उपस्थित रहे | संस्था अध्यक्ष दिनेश सेन ने बतलाया कि सूत्रधार कला संगम कुल्लू की स्थापना जून 1977 में कुछ उत्साही युवाओं द्वारा कला, संस्कृति एवं सामाजिक गतिविधियों हेतु की गई थी | संस्था का पहला कार्यक्रम 21 जून 1977 को कलाकेंद्र कुल्लू में रेडक्रॉस सोसाईटी कुल्लू के सहयोग हेतु किया गया | इसी कड़ी में संस्था द्वारा सूत्रधार वर्षगांठ उत्सव जोकि कुल्लू जनपद की युवा एवं बाल प्रतिभाओं को समर्पित है की शुरुआत संस्था के रजत जयंती वर्षगांठ उत्सव 2002 से शुरू हुई थी | संस्था द्वारा कुल्लू जनपद की युवा पीढ़ी जो अपनी संस्कृति से विमुख होती जा रही थी तथा दुर्व्यसनों में संलिप्त होती जा रही को अपनी संस्कृति से जोड़ने व उनकी युवा शक्ति का प्रयोग सृजनात्मक कार्यों में लगाने के उदेश्य से संस्था द्वारा इस तरह के सांस्कृतिक उत्सव आयोजन करने का निर्णय लिया गया तथा अपने उदेश्य के अनुरूप इस घाटी के बाल और युवा प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं की प्रतियोगिता हर साल आयोजित करती आ रही है | इस सांस्कृतिक प्रतियोगिता में आज इस घाटी के बजौरा से लेकर मनाली तक के निजी व सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन हर वर्ष करते आ रहे है | इस उत्सव के माध्यम से संस्था ने अबतक लगभग 20,000 से अधिक विद्यार्थियों को मंच प्रदान करवाया है



