कुल्लू अपडेट,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) भुट्टी में आज आशा कार्यकर्ताओं के लिए दिव्यांगता विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य आशा कार्यकर्ताओं को दिव्यांग बच्चों एवं व्यक्तियों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं और समावेशी विकास के प्रति जागरूक करना था।
इस अवसर पर डॉ. नम्रता उपस्थित रहीं। उन्होंने महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए आयोजनकर्ताओं का धन्यवाद किया।
कार्यशाला में साम्फ़िया संस्था की ओर से दिव्यांगता के क्षेत्र में दी जा रही सेवाओं की विस्तृत जानकारी साझा की गई।
बीजू हिमदल, कार्यक्रम प्रबंधक, ने साम्फ़िया द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों और सेवाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि साम्फ़िया फ़ाउंडेशन दिव्यांगता के क्षेत्र में जागरूकता लाने के लिए एक विशेष कार्यक्रम चला रहा है |
इसके साथ ही उन्होंने साम्फ़िया की थेरेपी सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी, जिसमें विशेष रूप से अर्ली इंटरवेंशन थैरेपी प्रोग्राम, थैरेपी ऑन व्हील्स, डीईआईसी (DEIC) तथा समावेशन (Inclusion) कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ये सेवाएं दिव्यांग बच्चों की समय पर पहचान और उनके समुचित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने ‘आश की आशा’ कार्यक्रम की जानकारी भी दी, जिसके तहत किसी दिव्यांग बच्चे की पहचान करने वाली आशा कार्यकर्ता को ‘आश की आशा’ उपाधि एवं प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।
डॉ. श्रुति मोरे, निदेशक साम्फ़िया, ने प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता एवं थेरेपी सेवाओं — जैसे फिजियोथैरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी, स्पीच थैरेपी एवं स्पेशल एजुकेशन — के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने दिव्यांगता की पहचान के तरीकों और समुदाय स्तर पर सहयोग व जागरूकता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, “दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए सामुदायिक स्तर पर जागरूकता और सहयोग अत्यंत आवश्यक है। यह कार्यशाला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।”
साथ ही उन्होंने सभी आशा कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि यदि बच्चों में प्रारंभिक अवस्था में किसी भी प्रकार का विकासात्मक विलंब (Developmental Delay) नजर आए, तो उन्हें तुरंत थैरेपी सेवाओं के लिए रेफ़र किया जाए।
इस कार्यशाला में कुल 22 आशा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।




