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हीट स्ट्रोक का मधुमेह के रोगियों को रहता है अधिक खतरा

राज्य में पिछले कुछ दिनों से चल रही लू यानी हीट वेव को लेकर वैसे तो कई सावधानियां बरतने की सलाह दी जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों द्वारा मधुमेह (शुगर) के रोगियों को हीट वेव से बचने की सख्त हिदायत दी जा रही है।

विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की दी सलाह, धूप से बचना तो ठीक, लेकिन ग्लूकोज को नियंत्रित करना बहुत जरूरी
शिमला (संतोष): 
राज्य में पिछले कुछ दिनों से चल रही लू यानी हीट वेव को लेकर वैसे तो कई सावधानियां बरतने की सलाह दी जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों द्वारा मधुमेह (शुगर) के रोगियों को हीट वेव से बचने की सख्त हिदायत दी जा रही है। गर्मी की लहरों (हीट वेव) से शुगर के रोगियों को कई परेशानियां हो सकती हैं, जैसे निर्जलीकरण, रक्त शर्करा का स्तर बढ़ना या घटना और हीट स्ट्रोक का खतरा प्रमुख होते हैं। सांस और हार्टबीट तेज रहती है और लोग बेहोश तक हो जाते हैं। मौसम के हालात देखते हुए हैल्थ एक्सपर्ट्स डायबिटीज के मरीजों को खासतौर पर धूप से बचने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि शुगर पेशैंट पर हीट स्ट्रोक दूसरों के मुकाबले ज्यादा होता है। धूप से बचना तो ठीक है, लेकिन उन्हें ग्लूकोज कंट्रोल भी करना चाहिए।

डायबिटीज व हीट का होता है बहुत खतरनाक कॉम्बीनेशन
विशेषज्ञों की मानें तो डायबिटीज और हीट का बहुत खतरनाक कॉम्बीनेशन होता है। डायबिटीज के रोगियों को इन दिनों सामान्य और स्वस्थ लोगों की तुलना में ज्यादा एलर्ट रहना चाहिए। दरअसल गर्मी की वजह से ब्लड ग्लूकोज का स्तर प्रभावित हो सकता है। गर्मी की वजह से शरीर से बहुत ज्यादा पसीना बहता है, जिस कारण बॉडी डिहाइड्रेट हो सकती है। डायबिटीज के मरीजों के लिए बॉडी का डिहाइड्रेट होना बहुत ज्यादा रिस्की होता है। शरीर में पानी की कमी होने के कारण ग्लूकोज लेवल बढ़ जाता है। शायद आपको पता हो कि डायबिटीज के मरीजों को स्वस्थ लोगों की तुलना में ज्यादा गर्मी लगती है। वास्तव में डायबिटीज की वजह से ब्लड वेसल्स और नर्व्स इफैक्टिड हो जाती हैं। ऐसे में स्वेट ग्लैंड पर भी बुरा असर पड़ता है। यही कारण है कि डायबिटीज रोगी का शरीर जरूरत अनुसार खुद को ठंडा नहीं कर पाता है। ऐसे में उन्हें ज्यादा गर्मी और हीट एक्जॉशन का रिस्क बढ़ जाता है। इसके अलावा, जब तापमान बढ़ता है, जो शरीर द्वारा इंसुलिन के उपयोग के तरीके बदल जाते हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डायबिटीज के रोगियों को समय-समय अपना ब्लड ग्लूकोज टैस्ट करवाते रहना चाहिए।

डायबिटीज के मरीजों में दूसरों के मुकाबले ही स्ट्रोक का रहता है अधिक खतरा : डाॅ. याचना
आईजीएमसी शिमला की डायटिशियन डा. याचना शर्मा ने कहा कि बीते कुछ दिनों से तापमान में बढ़ौतरी हुई है। ऐसे में दिनभर धूप में रहने वाले लोगों में हीट एग्जॉशन (गर्मी से थकावट) और हीट स्ट्रोक (लू) की आशंका बढ़ जाती है। हीट स्ट्रोक के लक्षणों में बेहोशी, तेज सांस लेना, मानसिक भ्रम और हृदय गति बढ़ जाती है। डायबिटीज के मरीजों को भी खास एहतियात बरतने की जरूरत है। क्योंकि शुगर पेशैंट पर हीट स्ट्रोक दूसरों के मुकाबले ज्यादा होता है। डायबिटीज के मरीज का शुगर लेवल अधिक होने की वजह से बार-बार यूरिन की समस्या बनी रहती है। ऐसे में अगर वह धूप में जाकर काम करेगा, तो पसीना अधिक आने से शरीर में पानी की कमी होगी, जो हीट स्ट्रोक की वजह बन सकती है धूप से बचना तो ठीक है लेकिन उन्हें ग्लूकोज कंट्रोल भी करना चाहिए। इंसुलिन हार्मोन सिर्फ शुगर कंट्रोल करने के लिए ही नहीं, बल्कि ब्रेन के लिए भी बहुत जरूरी है। ऐसे में जब शुगर पेशैंट का ब्रेन इंसुलिन रैजस्टिैंट हो जाता है तो स्मरणशक्ति घटने लगती है। अल्जाइमर की बीमारी हो जाती है और यह टाइप-2 और टाइप-3 पेशैंट को लेकर ज्यादा होता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए डाइट का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। खान-पान में बरती गई लापरवाही ब्लड शुगर लेवल बढ़ा सकता है। वर्कआऊट जरूर करें।

बचाव के लिए करें ये उपाय
खूब पिएं पानी: गर्मी के मौसम में डायबिटीज मरीजों को खूब पानी पीना चाहिए इससे डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर बना रहता है, जिससे दिक्कतें नहीं होती और जबरदस्त फायदे मिलते हैं। दिन में ज्यादा से ज्यादा पानी पीने पर फोकस करना चाहिए।

Kullu Update
Author: Kullu Update

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