Ahmedabad Plane Crash Sole Survivor: अहमदाबाद प्लेन क्रैश में जिंदा बचे विश्वास कुमार रमेश इलाज के बाद अपने घर दीव में रह रहे हैं. वह किसी से नहीं मिल रहे हैं. मगर, जिंदा बचने के बाद भी उनके आंखों से आंसू थम नह…और पढ़ें
हाइलाइट्स
- अहमदाबाद एयर इंडिया प्लेन क्रैश में विश्वास कुमार रमेश जिंदा बचे थे.
- सिविल अस्पताल से छुट्टी पाने के बाद अपने घर दीव में रह रहे हैं.
- रमेश कुमार मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं.
Plane Crash Sole Survivor Vishwas Kumar Ramesh Story: सीट नंबर 11B, दोपहर के 1:38 बजे थे, तभी एक विमान उड़ान भरते ही बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकराने के बाद आग के गोले में बदल जाता है. तभी 1000 डिग्री सेल्सियस तापमान में से एक व्हाइट टी-शर्ट से आदमी निकलता है. देख कर कोई भी नहीं कह सकता है कि वह भी उसी फ्लाइट में सवार था, जो अभी-अभी आग के गोले में बदल गई है, जिसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई है, बस इसे छोड़ कर. ये विश्वास कुमार रमेश थे, जो अहमदाबाद फ्लाइट क्रैश के इकलौते बचने वाले पैसेंजर थे, जी हां… यहीं इस हादसे के ‘लकी मैन’ थे. जिंदा बचने के बाद भी रमेश टूट गए हैं. इलाज के बाद वह अपने घर दीव में रह रहे हैं. मीडिया और आम जन से दूरी बनाए हुए हैं. किसी से बात नहीं कर रहे हैं. उनके आंखों से आंसू नहीं थम रहे हैं. खुद को घर में कैद कर लिया है. मगर क्यों?
विश्वास रमेश अहमदाबाद से 371 किलोमीटर अपने घर दीव में रह रहे हैं. इस हादसे में वह खुद तो जिंदा बच गए, मगर उनके भाई मारे गए. उनकी आंखों के आंसू नहीं थम रहे हैं. वह अपने भाई की अर्थी को कंधा देते समय रोते-रोते बेसुध हो गए थे. विश्वास को खुद विश्वास नहीं हो पा रहा है कि वह इस भयावह प्लैन क्रैश में जिंदा बच गए हैं. मगर, इस लकी मैन की स्थिति ऐसी है कि मीडिया से लेकर अधिकारियों और गांव वालों की भीड़ उनसे मिलने पहुंच रही है. अहमदाबाद पुलिस ने भी उनका बयान दर्ज किया है. वह लोगों के बीच कौतूहल के केंद्र बने हुए हैं. हर कोई उनसे मिलना चाह रहा है, जानना चाह रहा है कि आखिर उनके साथ हुआ क्या? वह कैसे जिंदा बच पाए?
घर के बाहर उदासी
विमान हादसे में जिंदा बचने के बाद भी सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं. इस दुखद घटना ने उनके परिवार को तोड़कर रख दिया है. उन्होंने खुद को मीडिया से दूर रखा है. हादसे में विश्वास भले ही बच गए, लेकिन उन्होंने अपने भाई अजय रमेश को खो दिया. उनके घर के बाहर एक अस्थायी टेंट लगा है. घर के बरामदे में अजय की तस्वीर रखी हुई है. रिश्तेदार और परिचित अजय की असामयिक मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं.
विश्वास का मीडिया दूरी
विश्वास रमेश के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा चार भाई थे. अजय की मृत्यु के बाद अब विश्वास और उनके दो अन्य भाई, नील और सनी बचे हैं. 12 जून 2025 को अहमदाबाद के मेहगानीनगर में हुए इस विमान हादसे ने 275 लोगों की जान ले ली. विमान बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकराया था, जिससे भारी तबाही मची. विश्वास की जीवित रहने की कहानी चमत्कारिक है, लेकिन उनके परिवार का दर्द अथाह है. लोग उनके इस चमत्कारिक रूप से बचने की कहानी को जानना चाह रहे हैं, मगर उन्होंने मीडिया और लोगों से साफ दूरी बना ली है.
खुशी और गम का संगम
बताते चलें कि दीव के रहने वाले विश्वास को इंग्लैंड की नागरिकता प्राप्त है. परिवार के करीबियों की माने तो लंदन में उनका गार्मेंट्स का बिजनेस है. साथ ही इंडिया में उनके परिवार के पास कुछ बोट्स हैं. बोट्स का इस्तेमाल इनका परिवार मछलियां पकड़ने के लिए करता है. विश्वास कुछ दिन लंदन तो कुछ दिन दीव में रहते हैं. घर में खुशी के साथ दुख का माहौल है. जहां एक तरफ एक बेटे के बचने की खुशी है, तो दूसरी ओर एक बेटे के खोने का भी गम है.




