राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि अब सततता ई नारा नहीं बल्कि अनिवार्यता बन गई है। कॉरपोरेट्स को मुनाफे के साथ-साथ पर्यावरण की लागत को भी ध्यान में रखना होगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू –
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार (23 जून) को स्पष्ट रूप से कहा कि “सततता (Sustainability) अब केवल एक नारा नहीं रह गया है, यह समय की आवश्यकता बन चुकी है।” वह यह बात द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के 12वें नेशनल स्टूडेंट्स कॉन्वोकेशन 2025 कार्यक्रम के दौरान कह रही थीं।
उन्होंने जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकट की ओर इशारा करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में कॉरपोरेट संगठनों का केवल लाभ कमाने का लक्ष्य अब अप्रासंगिक होता जा रहा है। अब समय आ गया है कि कंपनियां पर्यावरणीय लागत को भी अपनी योजनाओं और कार्यों में शामिल करें।
“कॉस्ट अकाउंटेंट्स भविष्य में बदलाव ला सकते हैं”
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जहां भी आर्थिक योजना की बात आती है, वहां कॉस्ट अकाउंटेंट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। आपकी दक्षता इस धरती के भविष्य को बचाने में बदलाव ला सकती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अकाउंटिंग और अकाउंटेबिलिटी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।
कॉर्पोरेट्स को अब बदलाव की जरूरत
राष्ट्रपति ने कॉर्पोरेट्स को चेताते हुए कहा कि उन्हें केवल प्रॉफिट-ओरिएंटेड अप्रोच से आगे बढ़कर अब इको-फ्रेंडली सोच को अपनाना होगा। पर्यावरणीय जिम्मेदारी अब एक वैकल्पिक विकल्प नहीं, बल्कि बिजनेस एथिक्स का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।
कॉर्पोरेट मामलों की सचिव का तकनीक पर जोर
इस कार्यक्रम में कॉरपोरेट अफेयर्स सेक्रेटरी दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने भी छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले समय में तकनीक, नवाचार और लचीलापन को अपनाना बेहद जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि कॉस्ट और मैनेजमेंट अकाउंटेंट्स देश को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।



