न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने देव राज व अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में यह आदेश दिया है।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट –
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जेबीटी अभ्यर्थियों को टीजीटी भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में अंतरिम (प्रोविजनली) रूप से भाग लेने की अनुमति दे दी है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने देव राज व अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में यह आदेश दिया है। खंडपीठ ने अभ्यर्थियों को राज्य चयन आयोग हमीरपुर की ओर से आयोजित होने वाली प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) भर्ती प्रक्रिया में अंतरिम रूप से भाग लेने की अनुमति दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी। वहीं, दूसरी ओर राज्य चयन आयोग को इसमें प्रतिवादी पांच के रूप में शामिल किया गया है। आयोग की ओर से पेश अधिवक्ता ने पावर ऑफ अटॉर्नी को दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह के समय की मांग की है। अदालत ने अगली सुनवाई तक सभी पक्षकारों को अपने जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि यदि याचिकाकर्ताओं को टीजीटी परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अनुमति दी जाती है तो राज्य सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी इन अभ्यर्थियों को मोहित ठाकुर बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य व अन्य मामले में 31 अक्तूबर 2023 के आदेश के माध्यम से टीजीटी कला के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में भाग लेने की अनुमति प्रदान की गई थी। अदालत के इस अंतरिम आदेश से याचिकाकर्ताओं को राहत मिली है, क्योंकि उन्हें अब टीजीटी भर्ती परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। राज्य चयन आयोग ने हाल ही में टीजीटी के लिए 937 पदों के लिए भर्ती निकली है। फार्म भरने के लिए अभ्यर्थियों को आवेदन 30 मई से 3 जुलाई तक जमा करने होंगे। याचिकाकर्ताओं की ओर तर्क दिए गए हैं कि एनसीटीई की स्पष्ट अधिसूचनाओं में निर्धारित किया गया है कि स्नातक डिग्री के साथ दो वर्षीय डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन धारक अभ्यर्थी भी कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को पढ़ाने की पूर्ण योग्यता रखते हैं। वर्तमान भर्ती नियम राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं हैं और इसके कारण हजारों योग्य अभ्यर्थी अपने वैध अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।
जेबीटी के नियमितीकरण आवेदनों पर विभाग समय पर दें निर्णय : हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जूनियर बेसिक टीचर्स (जेबीटी) के नियमितीकरण के आवेदनों पर राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को समय पर निर्णय देने के निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवॉल दुआ की अदालत ने याचिकाकर्ताओं के आवेदनों पर 6 सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार विचार कर निर्णय लेने को कहा है। अदालत ने कहा कि याचिकाओं में शामिल कानूनी मुद्दा पहले ही सुलझाया जा चुका है, उसके बावजूद भी संबंधित अधिकारी आवेदनों पर निर्णय समय से नहीं ले रहे हैं। कई महीनों तक निर्णय न लेने से न केवल अनावश्यक मुकदमों में बढ़ोतरी होगी, बल्कि न्यायालय के कार्य भार में भी वृद्धि होगी। आवेदनों का निपटारा समय पर न होने से कोर्ट में लगातार ऐसे मामले बढ़ रहे हैं।
अदालत ने कहा कि कल्याणकारी राज्य से अपेक्षा की जाती है कि वह पीड़ित कर्मचारियों के आवेदनों पर उचित समय के भीतर विचार करें और निर्णय ले। बजाय इसके कि उसे अनिश्चितकाल तक लंबित रखा जाए। सरकार को अपने कर्मचारियों को अदालत आने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। राज्य के मुकदमेबाज नीति का भी उद्देश्य है कि अनावश्यक मुकदमों को रोका जाए। याचिकाकर्ताओं कि मुख्य शिकायत थी कि उनकी ओर से दिए गए आवेदनों पर प्रतिवादियों और सक्षम अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जबकि न्यायालय ने इस मुद्दे को पहले ही सुलझा दिया है। याचिकाकर्ताओं ने जेबीटी के पद पर 27 अगस्त 2014 के कार्यालय आदेश के तहत अपनी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमितीकरण और उस अवधि की गणना वरिष्ठता के लिए करने की मांग की थी। उन्होंने अपने नियुक्ति पत्र से अनुबंध शब्द को हटाने की और साथ ही नियमित कर्मचारियों के समान सभी परिणामी लाभ दिए जाने को कहा था। अदालत ने पहले ही जेबीटी शिक्षकों के पक्ष में अपना फैसला दिया है।



