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बाढ़ के बाद अब भूख-प्यास से मरने की नौबत, सडक़ सुविधा न होने से नहीं पहुंच पाई राहत सामग्री

मंडी के प्रभावित क्षेत्रों में सडक़ सुविधा न होने से नहीं पहुंच पाई राहत सामग्री, गोहर में बंद रहेंगे स्कूल

मंडी जिला में बादल फटने से आई त्रासदी से प्रभावित क्षेत्र में चौथे दिन व्यवस्था सुचारू नहीं हो पाई। इसके चलते प्रभावितों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ है। जिला के सराज और थुनाग क्षेत्र में सडक़, मोबाइल सिग्रल कनेक्टिविटी पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। सडक़ न होने के कारण सराज क्षेत्र में लोगों तक राशन नहीं पहुंच पाया है। हालांकि बगस्याड़ और विभिन्न राहत शिविरों तक वायु व सडक़ मार्ग के माध्यम से करीब 500 राशन किट पहुंचाई गई हैं, लेकिन थुनाग क्षेत्र में सभी छोटे-बड़े पुल व सडक़ें क्षतिग्रस्त हो गए हैं। आगामी दिनों में सराज क्षेत्र के प्रभावित इलाकों में राशन की व्यवस्था नहीं हो पाई, तो प्रभावित लोगों को राशन का संकट पैदा हो सकता है। गुरुवार को भी थुनाग क्षेत्र के लोग राशन का इंतजार करते रहे, लेकिन मौसम की खराबी के कारण लोगों तक सुविधा नहीं पहुंच पाई है। लोग निराश होकर वापस लौट गए हैं।

इसके अलावा सराज क्षेत्र के प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था की बिगडऩे लग गई है। सडक़ ठप होने के कारण लोग स्वास्थ्य केंद्र तक मरीजों को पीठ या पालकी के सहारे पहुंचा रहे हैं। वहीं, आपदा प्रभावित थुनाग क्षेत्र से औद्यानिकी एवं वानिकी कालेज थुनाग के 92 बच्चों को सुरक्षित निकालकर उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया है। क्षेत्र में हो रही भारी बारिश के कारण ये विद्यार्थी व उनके अध्यापक यातायात साधन न के कारण वहीं फंस गए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार के निर्देशों पर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। उधर, हालात को देखते हुए गोहर क्षेत्र के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

मंडी में 148 सडक़ें ठप

मंडी जिला में एक एनएच सहित 148 सडक़ें अभी भी बंद पड़ी हुई है। वहीं 353 विद्युत लाइनों की सप्लाई ठप पड़ी हुई। इसके चलते सैकड़ों गांव अंधेरे की आगोश में है। इसके अतिरिक्त 605 पेयजल योजनाए ठप पड़ी हुई हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में पीने के पानी को लेकर बड़ा संकट गहरा गया है।

स्यांज में अब ड्रोन से चलेगा खोज अभियान

मंडी उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि बादल फटने की घटना से प्रभावित गोहर उपमंडल के स्यांज क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से खोज अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि बादल फटने के बाद आई बाढ़ में स्यांज गांव के दो घर बह गए थे। इस हादसे में अभी तक चार लोगों की दु:खद मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सात अन्य लापता हैं। इन लापता लोगों की खोज के लिए अब ड्रोन के माध्यम से प्रभावित क्षेत्र का व्यापक सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल व राज्य आपदा मोचन बल के सहयोग से राहत एवं बचाव अभियान जारी है। इसमें स्थानीय लोगों व स्वयंसेवियों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है।

198 लोग रेस्क्यू

उपायुक्त ने बताया कि जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ , पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से अब तक 198 लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है। थुनाग में जरूरी भवनों की बिजली आपूर्ति बहाल को कर दी गई है । इससे अब राहत कार्यों में तेजी आएगी।

Kullu Update
Author: Kullu Update

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