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रोप-वे रोको… सडक़ों पर उतरी महिलाएं

रामशिला में सडक़ों पर उतरी महिलाएं, बिजली महादेव रोप-वे को लेकर जमकर नारेबाजी


हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला के खराहल घाटी पर में भगवान बिजली महादेव तक सैलानियों की पहुंच आसान हो सके। इसके लिए केंद्र सरकार के द्वारा ढाई सौ करोड रुपए की लागत से रोपवे का निर्माण किया जा रहा है। इन दिनों रोपवे निर्माण के लिए वन विभाग के द्वारा जंगल में पेड़ों को काटने की प्रक्रिया को भी पूरा किया जा रहा है, लेकिन जंगल में हो रहे पेड़ कटान के वीडियो और फोटो को देखकर स्थानीय लोगों ने रोपवे का विरोध करना शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल को काटकर जो विकास किया जा रहा है। वह स्थानीय लोगों को बिल्कुल भी मंजूर नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर खराहल घाटी के ग्रामीणों के द्वारा कुल्लू के रामशिला में धरना प्रदर्शन किया गया और सरकार से मांग रखी गई कि इस रोपवे को रद्द किया जाना चाहिए। रामशिला में प्रदर्शन को करने पहुंचे ग्रामीण कंचन, विजय कुमार, शांता देवी और हेमा शर्मा ने बताया कि इससे पहले भी भारत के कई पहाड़ी इलाकों में विकास के लिए जंगलों को काटा गया। लेकिन बाद में वहां पर लोगों को प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ा। ऐसे में खराहल घाटी के लोग ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहते हैं कि जंगल काटन के चलते उनके इलाके में कोई प्राकृतिक आपदा का प्रकोप उन्हें झेलना पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि रोपवे निर्माण को लेकर पहले कुछ नेताओं ने इसका विरोध किया था। लेकिन बाद में अब वह भी चुप हो गए हैं।

इससे पता चलता है कि नेताओं की भी आपसी मिली भगत है। भगवान बिजली महादेव के द्वारा रोपवे निर्माण को लेकर पहले ही अपना पक्ष रखा गया और उन्होंने रोपवे निर्माण को लेकर साफ इनकार किया है। लेकिन उसके बावजूद भी प्रशासन सरकार रोपवे का निर्माण कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि बीती शाम के समय भी जब एक ट्रक में लकडिय़ों को काट कर ले जाया जा रहा था। तो उस दौरान भी महिलाओं ने ट्रक को रोक दिया था। उस दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि मंगलवार को वह प्रशासन की टीम के साथ मिलकर ग्रामीणों से बात करने आएंगे। लेकिन मंगलवार को भी उनके पास कोई नहीं पहुंचा। ऐसे में ग्रामीण ने एक बार फिर से मांग रखते हैं कि इस रोपवे निर्माण को रद्द करने की बात कही है। वरना ग्रामीणों के द्वारा फिर से धरना प्रदर्शन किया जाएगा। हालांकि इससे पहले भी रोपवे के विरोध में धरना प्रदर्शन किया गया था। उस दौरान रोपवे के विरोध में बाजार भी बंद कुछ घंटों के लिए रखा गया था। लेकिन अब जब रोपवे को लेकर पेड़ कटान शुरू हुआ है। इसे लेकर अब ग्रामीण काफी हताश है कि पेड़ों को काटना सही नहीं है। ऐसे में प्रदेश व केंद्र सरकार से इस रोपवे को रद्द करने की मांग की जा रही है।

क्या बोले ग्रामीण
मौके पर पहुंचे ग्रामीणों विजय कुमार, बिजली महादेव महिला मंडल की प्रधान शाता, हेमा शर्म का कहना है कि पेड़ कटान को लेकर ग्रामीणों को खासा गुस्सा है। बिजली महादेव हमारे आराध्य देवता है। ऐसे में वनों का कटान करना सही नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि पांच पंचायतों में से किसी ने भी अपनी एनओसी रोपवे लगाने के लिए न तो कंपनी को दी है और न वन विभाग को। ऐसे में रोपवे लगाना सही नहीं है। यहीं जिन जंगलों को आज काटा जा रहा है कि उस जंगल में पेड़ उनके बुजुर्गो ने लगाए हैं न कि वन विभाग के अधिकारियों ने। यहां के लोगों का हक है। उनके टीडी मिले। वह यहां के वर्तनदार है। लेकिन विभाग ने कैसे कंपनी को करीब 204 पेड़ काटने की अनुमति दे दी और पंचायतों से पूछा तक नहीं। यही नहीं महिलाओं का कहना है कि देवता के स्थान के आसपास सूखे में ही दरारें आनी शुरू हो गई है। अगर बारिश होगी तो सोचो क्या होगा। ग्रामीणों ने कहा कि जो लोग बिक गए है उन्हें क्या कहे। लेकिन ग्रामीण कोई बिकने वाला नहीं है।

Kullu Update
Author: Kullu Update

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