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इस देश ने यात्रियों से भरी फ्लाइट को समझ लिया था दुश्मनों का सैन्य विमान, हवा में कर दिया अटैक….भरभराकर बिछ गई 298 यात्रियों की लाशें

17 जुलाई 2014 को मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH17 रोज़ की तरह अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी। लेकिन किसी को क्या पता था कि यह सफर कभी खत्म नहीं होगा। एक देश ने इस फ्लाइट को सैन्य विमान समझने की ‘घातक गलती’ की और आकाश में ही उसे मिसाइल से उड़ा दिया।…

17 जुलाई 2014 को मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH17 रोज़ की तरह अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी। लेकिन किसी को क्या पता था कि यह सफर कभी खत्म नहीं होगा। एक देश ने इस फ्लाइट को सैन्य विमान समझने की ‘घातक गलती’ की और आकाश में ही उसे मिसाइल से उड़ा दिया। पलभर में आसमान से आग और धुआं बरसने लगा… और नीचे ज़मीन पर बिछ गई 298 मासूम लोगों की लाशें। 11 साल बाद, अब जाकर यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने इस त्रासदी पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें रूस को इस भीषण हमले के लिए दोषी ठहराया गया है।

 क्या हुआ था 17 जुलाई 2014 को?
मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH17, जो एक बोइंग 777 विमान था, उस दिन एम्स्टर्डम से कुआलालंपुर की उड़ान पर था। विमान जैसे ही पूर्वी यूक्रेन के ऊपर से गुजर रहा था- उस क्षेत्र से, जो उस समय रूस समर्थित विद्रोहियों के नियंत्रण में था, अचानक ही उसे एक बक मिसाइल से मार गिराया गया। इस भीषण हमले में 283 यात्रियों और 15 चालक दल के सदस्य मारे गए। मृतकों में 198 डच, 43 मलेशियाई, 38 ऑस्ट्रेलियाई, और 10 ब्रिटिश नागरिक शामिल थे।

11 साल बाद यूरोपियन कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया
ECHR ने अपने 501 पन्नों के विस्तृत फैसले में कहा कि विमान को जानबूझकर रूस निर्मित सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल से निशाना बनाया गया। अदालत के अनुसार, यह मिसाइल या तो रूसी सैन्य बलों ने दागी थी या रूस समर्थित अलगाववादियों ने। यह भी संभावना जताई गई कि हमलावरों ने इसे गलती से सैन्य विमान समझ लिया था।

कोर्ट ने यह भी कड़ी टिप्पणी की कि रूस ने न केवल इस हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया, बल्कि उसने इस त्रासदी की निष्पक्ष और गहराई से जांच करने में भी कोई सहयोग नहीं किया। मुख्य न्यायाधीश मटियास गुओमार ने कहा कि रूस का यह व्यवहार अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इससे पीड़ितों के परिजनों के दुःख को “काफी गहरा” किया।

  • रूस पर अन्य आरोप भी लगे
  • इस ऐतिहासिक फैसले में MH17 हादसे के अलावा रूस पर 2014 से यूक्रेन में व्यापक मानवाधिकार हनन का भी आरोप लगाया गया है, जिनमें शामिल हैं:
  • -आम नागरिकों की हत्या
  • -यातना और बलात्कार
  • -नागरिक ढांचे को नष्ट करना
  • -यूक्रेनी बच्चों का जबरन अपहरण

यूक्रेन और नीदरलैंड्स की प्रतिक्रिया
इस फैसले पर यूक्रेन और नीदरलैंड्स ने राहत और संतोष जताया है। यूक्रेन के न्याय मंत्रालय ने इसे “ऐतिहासिक और अभूतपूर्व” बताते हुए कहा कि यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय मंच पर रूस की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री कैस्पर वेल्डकैंप ने कहा, यह फैसला उन परिवारों के लिए न्याय और मान्यता लाता है जिन्होंने अपनों को खोया, हालांकि इससे उनका दर्द कम नहीं होता।

रूस का विरोध और इनकार
रूसी सरकार ने फैसले को सिरे से खारिज करते हुए इसे “अमान्य” बताया। क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेसकोव ने स्पष्ट शब्दों में कहा, हम इस फैसले को नहीं मानते और इसे शून्य मानते हैं। रूस ने हमेशा यह दावा किया है कि MH17 हादसा यूक्रेनी सेना या अन्य कारणों से हुआ था। लेकिन यूरोपियन कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट रूप से इसे रूस या रूस समर्थित गुटों की करतूत करार दिया।

पिछले फैसले और अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई
इस फैसले से पहले, 2022 में नीदरलैंड्स में एक आपराधिक मुकदमे में दो रूसी नागरिकों और एक यूक्रेनी विद्रोही को अनुपस्थिति में हत्या के कई मामलों में दोषी ठहराया गया था। तीनों को आजीवन कारावास की सजा हुई, लेकिन वे आज भी फरार हैं और रूस ने उन्हें प्रत्यर्पित करने से इनकार कर दिया है।

इसके अलावा, मई 2025 में इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) ने भी रूस को इस हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड्स ने रूस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की।

Kullu Update
Author: Kullu Update

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