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अब चिप्‍स और बिस्‍कुट के रैपर पर दौड़ेगी आपकी गाड़ी, किसने खोजी नई तकनीक?

CRRI- सेंटर रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने ऐसी तकनीक खोजी है, जिसमें रिसाइकल न होने वाले कचरे से सड़क का निर्माण किया जा सके. इस तकनीक का नाम जिलोसेल है, दिल्‍ली में पहली बार इस तकनीक से सड़क का निर्माण हो रहा ह…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • सीआरआरआई ने खोजी नई तकनीक
  • जियोसेल नाम की इस तकनीक से बनेंगी सड़कें
  • दिल्‍ली में बन रही है नई तकनीक से पहली सड़क

नई दिल्‍ली. आपके द्वारा फेंके गए चिप्‍स या बिस्‍कुट के रैपर पर वाहन दौड़ेंगे. खास बात यह है कि इस सफर में आपको झटके भी नहीं लगेंगे. सेंटर रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) ने ऐसी तकनीक खोज निकाली है. जिससे रिसाइकल न होने वाली प्‍लास्टिक समेत कचरे से सड़क बनाई जा सके. नई तकनीक देश में पहली सड़क का निर्माण राजधानी दिल्‍ली में डीएनडी-फरीदाबाद-केएमपी एक्सप्रेसवेमें किया जा रहा है.

देश में पहली बार बनाई जाएगी चिप्‍स और बिस्‍कुट के रैपर से सड़क, सेंट्रल फार रोड रिसर्च इंस्‍टीट्यूट (सीआरआरआई) बना रहा है दिल्‍ली में सड़क, डीएनडी-फरीदाबाद-केएमपी एक्सप्रेसवे पर 160 मीटर लंबी होगी यह रोड, इसमें 20 टन बेकार प्लास्टिक का उपयोग होगा. प्लास्टिक कचरे का निस्‍तारण एक बड़ी समस्‍या बनता जा रहा है. खासकर ऐसे प्‍लास्टिक का जो रिसाइकल नहीं की जा सकती है. इसके लिए लगातार कोशिश की जा रही हैं, नगरपालिका के मिश्रित कचरे, खासकर मिश्रित प्लास्टिक चैलेंज बनता जा रहा है. रिसाइकल न होने वाले कचरे का समाधान खोजने के लिए सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) लगातार रिसर्च कर रहा था, अब उसे सफलता मिल गयी है.

ये है तकनीक

सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने मिलकर पुराने और मिश्रित कचरे वाले प्लास्टिक का समधान खोज लिया है. जिसे जियोसेल कहते हैं. ऐसे प्लास्टिक को रीसाइकिल करना मुश्किल होता है, क्योंकि उनकी क्‍वालिटी में भारी अंतर होता है.

ट्रायल हो चुका है

ऐसे प्‍लास्टिक को मैकेनिकल रीसाइक्लिंग के जरिए प्रोसेस करके 4 से 8 मिलीमीटर मोटाई वाली शीट या मॉड्यूल बनाए जाते हैं. टाटा प्रोजेक्‍ट के साथ मिलकर रिसाइकल न होने वाले प्‍लास्टिक से बने जियोसेल का ट्रायल सफला पूर्वक किया गया है.

पहली बार बनेगी यह सड़क

सीआरआरआई और बीपीसीएल, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के सहयोग से दिल्ली में डीएनडी-फरीदाबाद-केएमपी एक्सप्रेसवे के लूप पर इस तकनीक से पहली सड़क बनेगी. यह देश की पहली सड़क होगी, जिसमें पुराने और रिसाइकल प्‍लास्टिक से सड़क का निर्माण किया जाएगा. 160 मीटर लंबी रोड बनाई जाएगी. इसम

20 से 25 टन प्‍लास्टिक का इस्‍तेमाल

इस रोड के निर्माण में 80 मीटर जियोसेल और 80 मीटर मॉड्यूल के लिए होंगे, जिससे कुल 1,280 वर्ग मीटर क्षेत्र कवर होगा. इसमें लगभग 20-25 टन कचरे का प्लास्टिक, मॉड्यूल और जियोसेल का इस्तेमाल होगा.

सरकार के मिशन को पूरा करने वाली सड़क

इंडियन रोड्स कांग्रेस के निर्देशों के तहत मल्टी-लेयर प्लास्टिक (MLP) का अधिक उपयोग किया जाता है. यह तकनीक रिसाइकल न होने वाले कचरे और सड़क की मजबूती बढ़ाने वाली है. सााथ ही लंबी उम्र वाली सड़क भारत सरकार के स्‍वच्‍छ भारत मिशन को पूरा करने वाली है.

Kullu Update
Author: Kullu Update

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