जिला मंडी की सराज घाटी में 30 जून की रात को आई त्रासदी से सड़कों के अवरुद्ध होने से गांवों तक मदद पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है। पढ़ें पूरी खबर…

सराज घाटी में आपदा ने 80 हजार की आबादी को संकट में डाल दिया है। आपदा के 12वें दिन भी लोग जीवन को नए सिरे से शुरू करने की जद्दोजहद में जुटे हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, प्रशासन और स्थानीय लोग राहत कार्यों में लगे हैं। सड़कों के अवरुद्ध होने से गांवों तक मदद पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है। रोड़, बहलीधार, बूंगरैलचौक और ढीमकटारू पंचायतों के गांव सड़क संपर्क टूटने से कटे हुए हैं। रोड़ पंचायत की पूर्व प्रधान बबली देवी बताती हैं कि राहत सामग्री दी जा रही है, लेकिन प्रभावितों को सड़क तक बुलाया जा रहा है। शिल्ह, चापड़ गांव बेहद मुश्किल में हैं। यहां 25 मकान पूर्णतः, 30 आंशिक रूप से और 26 गोशालाएं तबाह हुई हैं।
थुनाग के साथ लगती बहलीधार के बन्याड़ गांव के कुलदीप सिंह कहते हैं कि सेना के अलावा कोई उनके गांव तक नहीं पहुंचा। चिमटी, सलूट, बदनेच, शुरल, थलीधार, जोहड़ और कचूट गांवों की स्थिति भी ऐसी ही है। यहां एक दर्जन से अधिक मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। प्रभावित मस्त राम, जय सिंह, नरेंद्र कुमार, मोहन, नंद लाल, कर्म सिंह, लाभ सिंह और नरेंद्र कुमार सब कुछ गंवाकर रिश्तेदारों के पास शरण लिए हुए हैं। कुलदीप सिंह ने बताया कि राशन किट के अलावा कोई मदद नहीं मिली। पंचायत में आपदा से जानी नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन बड़ी संख्या में घर बाढ़ में बह गए।
उपतहसील बागाचनोगी की शिल्हीबागी, बागाचनोगी, शिवा कुठेहड़, भाटकीधार, कलहणी, खबलेच और जैंशला पंचायतें भी उपमंडल मुख्यालय से कटी हुई हैं। लंबाथाच-कलहणी-पंडोह मार्ग बंद है। वायुसेना ने हेलिकाप्टर से राहत सामग्री दी, लेकिन उसके बाद कोई मदद नहीं पहुंची। भाटकीधार के पूर्व प्रधान शिव लाल बताते हैं कि बिजली-पानी बहाल नहीं हुआ। उपतहसील छतरी की गतू, खुनाची, ब्रेयोगी, मेहरीधार, काकड़ाधार, बहल, बगड़ाथाच और छतरी पंचायतों में जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सड़कें बंद होने से भारी दिक्कतें हैं।
चैल-जंजैहली सड़क बहाल होने से राहत
चैल-जंजैहली सड़क छोटे वाहनों के लिए बहाल होने से बगस्याड़, थुनाग, लंबाथाच, जरोल, पांडव शीला, कुथाह, बूंगरैलचौक, संगलवाड़ा और जंजैहली में प्रशासन ने सभी परिवारों को राशन उपलब्ध करवाया है। स्वयंसेवी संस्थाएं राशन, बर्तन और घरेलू जरूरत की चीजें बांट रही हैं, जिससे राहत कार्यों में तेजी आई है।



