बच्चे स्कूल पहुंचे तो खुशी में एक-दूसरे के गले लग गए। चेहरे पर खुशी झलक रही थी तो भीतर प्राकृतिक आपदा का खौफ भी समाया था जो एक-दूसरे से साझा किया।

बुलंद हौसलों के साथ जब बच्चे स्कूल पहुंचे तो खुशी में एक-दूसरे के गले लग गए। चेहरे पर खुशी झलक रही थी तो भीतर प्राकृतिक आपदा का खौफ भी समाया था जो एक-दूसरे से साझा किया। हिमाचल प्रदेश के सराज क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा के बाद सोमवार को स्कूल खुल गए। इस दौरान विद्यार्थी टूटे रास्तों और कीचड़ को पार कर स्कूल पहुंचे। हालांकि, पहले दिन स्कूलों में 60 फीसदी के करीब ही हाजिरी रही। सीनियर सेकेंडरी स्कूल बगस्याड़ में विद्यार्थियों ने एक-दूसरे से गले मिलकर आपदा की कठिनाइयों को भुलाने की कोशिश की।
बच्चों में उत्साह का माहौल था। अभिभावक बच्चों के साथ स्कूल में समय बिताते और शिक्षकों से चर्चा करते नजर आए। बच्चों के साथ स्कूल पहुंचे अभिभावकों ने बताया कि आपदा में किताबें, बैग और पढ़ाई की सामग्री खो दी है। क्षेत्र के कुछ हिस्सों में बिजली और इंटरनेट भी नहीं है। इससे ऑनलाइन पढ़ाई भी प्रभावित हुई। समाजसेवियों ने नोटबुक और स्टेशनरी दान करने का वादा किया, जबकि सेवानिवृत्त शिक्षक बच्चों की मदद के लिए आगे आए।
एसडीएम थुनाग रमेश कुमार ने बताया कि नौ प्राइमरी स्कूल 16 जुलाई तक बंद रहेंगे। अभिभावक रोशन लाल और रीना ने बताया कि यह दिन न केवल बच्चों के लिए नई शुरुआत है, बल्कि सराज के लोगों की एकजुटता और उम्मीद का भी प्रतीक बना। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक यशवीर धीमान ने बताया कि आपदा के बाद पहले दिन सोमवार को स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही है। धीरे धीरे व्यवस्था पटरी पर लाई जा रही है।
जंजैहली में बिजली बहाल, नालों और चट्टानों में ढूंढे जा रहे लापता
सराज में आपदा के 15वें दिन बाद जनजीवन पटरी पर लौटने लगा। सोमवार से जहां स्कूल खुल गए वहीं, बगस्याड़ तक मार्ग को बहाल कर बस सेवा शुरू हो गई। जंजैहली में भी सोमवार को बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी। आपदा के बाद लापता 27 लोगों को तलाशने का अभियान सोमवार को भी जारी रहा। एनडीआरएफ, सेना और पुलिस जवानों के साथ स्थानीय लोगों ने खड्ड, नालों और बड़ी-बड़ी चट्टानों में लापता लोगों को ढूंडा।
गाद से भरे घर पूर्ण क्षतिग्रस्त मानेगी प्रदेश सरकार : शांडिल
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनीराम शांडिल ने सोमवार को सराज में आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने सभी प्रभावितों के साथ एकजुट खड़े रहकर प्रदेश सरकार की ओर से हरसंभव मदद की प्रतिवद्धता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से सराज क्षेत्र को सात करोड़ रुपये तुरंत प्रभाव से जारी किए गए हैं। जिन घरों में गाद भरी है, बड़े पत्थर आ गए हैं या जो अब असुरक्षित हैं, उन्हें पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त श्रेणी में डालने पर सरकार विचार कर रही है, ताकि प्रभावितों को अधिक से अधिक मुआवजा मिल सके। क्षतिग्रस्त घरों के सामान और पशुधन का मुआवजा भी प्रदेश सरकार देगी। अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें



