
कुल्लू अपडेट, सड़को पर घूम रहे बेसहारा सैकड़ों पशु आश्रय की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। इन बेजुबान पशुओं को न तो गोसदन संचालक वाले पूछने को तैयार हैं और न ही प्रशासन। सरकार और प्रशासन की योजनाएं कागजों तक ही फिलहाल सीमित लग रहे हैं। जिला कुल्लू की सडक़ों पर सैंकड़ों की संख्या में बेहसारा पशु घूम रहे हैं। धार्मिक एवं पर्यटन नगरी मणिकर्ण की बात करें तो भुंतर से लेकर मणिकर्ण तक सैंकड़ों पशु सडक़ों पर है। कुल्लू-भुंतर सडक़ पर काफी संख्या में बड़े-बड़े बेसहारा पशु सडक़ पर है। यह वाहन चालकों और पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए परेशानी बने हैं। वहीं, सडक़ पर वाहन की टक्कर में कई बार बेसहारा पशु भी आ रहे हैं। जिससे हादसे भी हो रहे हैं।
इन पशुओं को कहां आश्रय दिया जाए, अभी तक शासन-प्रशासन से लेकर पंचायतें चुपी साधे हैं। हालांकि बैठकों में बेसहारा पशुओं को लेकर बड़ी-बड़ी चर्चाएं और योजनाएं तैयार की जाती है, लेकिन योजनाएं चर्चाओं से आगे धरातल पर उतरती दिखाई नहीं दे रही है। हैरानी की बात तो यह है कि अभी तक जिला कुल्लू बेसहारा घूम रहे पशुओं को बड़े गोसदन की सुविधा का प्रावधान करवाने में प्रशासन, सरकार ने भी कोई उचित कदम नहीं उठाए हैं।
कई पशुओं की वाहनों की चपेट में आने से मौत हो गई है। हैरानी की बात तो यह है कि घाटी में घूम रहे बेसहारा पशुओं में कई पशु टैग लगे हुए भी हैं। इन पशुओं की पहचान क्यों नहीं की जा रही है। बताया जाता है कि जिन पशुओं के टैग लगे होते हैंए उन्हें तुरंत पहचाना जाता है कि इनके मालिक कौन है। लेकिन यहां पर पहचान करने का कार्य भी नहीं हो रहा है। अब तक किसी भी लोगों पर पशुओं को बेसहारा छोडऩे पर कार्रवाई नहीं की गई है। क्षेत्र वासियो का कहना है कि भुंतर, शमशी से लेकर ढालपुर तक सडक़ों पर बेसहारा पशुओं ने डेरा जमाया होता है। कई बार सडक़ पर वाहन चलाने मुश्किल हो जाते हैं। बेसहारा पशु लगातार लोगों फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सरकार और प्रशासन जल्द बेसहारा पशुओं के लिए गौसदन का प्रावधान घाटी में करें जिससे समस्या हल होगी। पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए बेसहारा पशु परेशानी बने हैं, उन्होंने राहत की मांग की है। -एचडीएम



