हिमाचल प्रदेश सरकार की नई जॉब ट्रेनी पॉलिसी को लेकर विपक्ष और बेरोजगार युवाओं में नाराजगी है। इसी के चलते सरकार को सफाई देनी पड़ी है।
सरकार ने कहा है कि इस नीति का उद्देश्य कामकाज को बेहतर बनाना और कर्मचारियों को नियमित नौकरी देना है। पहले जहां कर्मचारियों को 2 से 8 साल के बाद पक्का किया जाता था, अब नई नीति में 2 साल के बाद ही पक्का किया जाएगा।
2 साल बाद नौकरी नहीं जाएगी
सरकार ने कहा है कि यह गलतफहमी है कि 2 साल के बाद कर्मचारियों की नौकरी खत्म हो जाएगी। ऐसा कोई नियम इस पॉलिसी में नहीं है। यह नीति पुरानी अनुबंध नीति जैसी ही है, लेकिन इसे और पारदर्शी और प्रभावी बनाया गया है।ट्रेनी को 2 साल तक प्रशिक्षण (Training) दिया जाएगा।इसके बाद एक साधारण विभागीय परीक्षा होगी।परीक्षा पास करने वालों को नियमित (पक्का) कर दिया जाएगा।यह व्यवस्था हिमाचल लोक सेवा आयोग और राज्य चयन आयोग से चयनित युवाओं पर लागू होगी।
कब से लागू होगी नई नीति?
यह पॉलिसी 14 मई, 2025 के बाद की सभी भर्तियों पर लागू होगी।इसमें ग्रुप A, B और C की नौकरियां शामिल हैं।पुरानी नीति में क्या दिक्कत थी?
सरकार का कहना है कि पुरानी अनुबंध नीति में कई खामियां थीं नियमित करने में देरी होती थी।कई केस कोर्ट तक पहुंच जाते थे।कर्मचारियों को अस्थिरता और तनाव रहता था। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए नई पॉलिसी बनाई गई है।
सरकार ने अग्निवीर योजना पर भी सवाल उठाए
सरकार ने यह भी पूछा है कि जिन युवाओं को अग्निवीर योजना के तहत 23 साल की उम्र में बाहर कर दिया जाएगा, उनके लिए केंद्र सरकार क्या योजना बना रही है? सरकार ने कहा कि आलोचना करने वालों को इस पर भी जवाब देना चाहिए। नई जॉब ट्रेनी पॉलिसी का मकसद युवाओं को बेहतर ट्रेनिंग देकर उन्हें पक्का रोजगार देना है। सरकार का कहना है कि यह नीति युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए है, न कि नौकरी छीनने के लिए।




