
सिरमौर जिले की दुर्गम पंचायत क्यारी गुंडाहां से इंसानियत, सेवा और साहस की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जो हर किसी को भावुक कर रही है। यहां के दो ग्रामीणों दया राम और लाल सिंह ने वो कर दिखाया, जो शायद ही कोई सोच सके उन्होंने 2 क्विंटल से ज़्यादा वज़न की एक बीमार गाय को अपनी पीठ पर बांधकर 3 किलोमीटर का फिसलन भरा पहाड़ी रास्ता तय किया, ताकि उसे समय पर इलाज मिल सके।
भारी बारिश से टूटा रास्ता, फिर भी नहीं टूटा हौसला
हाल के दिनों में क्षेत्र में भारी बारिश के कारण रास्ते पूरी तरह से टूट चुके थे और मलबा जमा होने से वाहन चलाना असंभव हो गया था। गांव के किसान की गाय अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गई थी, लेकिन निकटतम पशु चिकित्सालय 3 किमी दूर था। गांववाले मान चुके थे कि अब गाय को बचा पाना मुश्किल है।
तभी दया राम और लाल सिंह ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक बड़ा फैसला लिया। रस्सियों की मदद से उन्होंने गाय को अपनी पीठ पर बांधा और फिसलन भरे पथरीले रास्तों पर चल पड़े। यह सफर किसी चमत्कार से कम नहीं था।
गौ सेवा बना कर्तव्य, गाय की जान बची
कई घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद दोनों गांववाले अस्पताल पहुंचे और समय पर इलाज मिलने से गाय की जान बच गई। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। जब वे लौटे, तो पूरा गांव भावुक हो उठा और उनकी इस सेवा भावना को नमन किया। दया राम ने घटना के बाद कहा, “गौ माता हमारी देवी हैं। उनकी सेवा हमारा धर्म है, उपकार नहीं। यह कथन सच्ची आस्था और सेवा की भावना को दर्शाता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, लोग कर रहे हैं सलाम इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। देशभर से लोग इन दो ग्रामीणों की बहादुरी और निस्वार्थ सेवा को सराह रहे हैं। पंचायत प्रधान ने भी उनकी सराहना की और कहा कि यह क्षेत्र बेहद दुर्गम है, लेकिन इन दोनों की हिम्मत ने सबको प्रेरित किया है।
सीख जब सेवा भाव और हौसला साथ हो, तो कोई रास्ता कठिन नहीं होता यह कहानी केवल एक गाय को बचाने की नहीं, बल्कि यह दिखाती है कि जब इंसानियत, श्रद्धा और साहस साथ हों, तो कोई भी बाधा पार की जा सकती है।



