
कुल्लू अपडेट बार-बार आई प्राकृतिक आपदाओं और प्रशासनिक उदासीनता के बावजूद मलाणा गांव के लोगों ने फिर से साहस और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। बीते शुक्रवार को आई मलाणा नदी की बाढ़ ने गांव को जोड़ने वाले दो मुख्य पुलों को बहा दिया, जिससे ग्रामीणों का बाहरी दुनिया से संपर्क टूट गया।
हालांकि यह दुर्घटना कोई पहली बार नहीं हुई। पिछले साल भी ऐसे ही हालात बने थे, जब पुल बाढ़ में बह गए थे और सरकार से गुहार लगाने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं मिला। इस बार भी कोई सरकारी मदद न मिलने के बावजूद मलाणा के लोगों ने स्वयं अपने बलबूते नदी पर नया पुल बनाने का काम शुरू कर दिया है।
जनशक्ति से बनी राह
रविवार को, मलाणा के 200 से अधिक ग्रामीणों ने मिलकर नेरंग के पास पुल निर्माण का कार्य आरंभ किया। ग्रामीणों ने मलाणा डैम की एक दीवार से पार होकर दोनों तरफ डंगे लगाए और काम की शुरुआत की। ग्रामीणों ने सीमित संसाधनों, स्थानीय तकनीक और जुगाड़ के सहारे पुल बनाने का जिम्मा खुद उठाया।
मलाणा पंचायत के प्रधान राजू राम ने बताया की शुक्रवार की बाढ़ में हमारे दो पुल बह गए, जिससे गांव का संपर्क पूरी तरह कट गया था। सरकार से कोई मदद नहीं मिली, इसलिए हमने खुद ही पुल निर्माण की जिम्मेदारी ली है, जैसे पिछले साल किया था।”
सरकार की नाकामी पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों का कहना है कि लगातार दो वर्षों से बाढ़ से पुल बहते जा रहे हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन की ओर से स्थायी समाधान नहीं मिला। मलाणा जैसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में हर साल पुल बहना जनसुरक्षा और आधारभूत ढांचे की विफलता को उजागर करता है।
इच्छाशक्ति और एकता की मिसाल
मलाणा के लोगों की यह पहल बताती है कि जब इच्छाशक्ति और एकता मजबूत हो, तो कोई भी संकट छोटा हो जाता है। बिना सरकारी सहायता, सिर्फ जनबल और आत्मविश्वास के बल पर पुल निर्माण कर रहे ग्रामीणों ने यह सिद्ध कर दिया कि समस्या का हल प्रशासन से ज़्यादा जनता के आत्मबल में छिपा होता है।



