
शिमला, हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में स्क्रब टाइफस से पहली मौत दर्ज की गई है। यह मामला एक 34 वर्षीय महिला का है, जिसे रोहड़ू के सिविल अस्पताल से गंभीर हालत में IGMC रेफर किया गया था। महिला को सैप्सिस और सैप्टिक शॉक जैसी गंभीर चिकित्सकीय स्थिति के चलते भर्ती किया गया था, और जांच में वह स्क्रब टाइफस पॉजिटिव पाई गई। इलाज के दौरान महिला की हालत और बिगड़ गई, और रविवार तड़के करीब 3 बजे उसकी मौत हो गई।
IGMC में स्क्रब टाइफस से यह इस साल की पहली पुष्टि की गई मौत है। अब तक अस्पताल में स्क्रब टाइफस के कुल सात मामलों की पुष्टि हुई है। मृत महिला को मेडिकल इंटेंसिव केयर यूनिट (MICU) में रखा गया था, जहां वह उपचाराधीन थी। महिला की शनिवार को आई रिपोर्ट में स्क्रब टाइफस संक्रमण की पुष्टि हुई थी, लेकिन संक्रमण के गंभीर रूप और समय पर इलाज न मिलने के कारण उसकी जान नहीं बच सकी।
क्या है सैप्सिस और सैप्टिक शॉक?
सैप्सिस एक गंभीर मेडिकल स्थिति होती है, जो शरीर में संक्रमण के कारण उत्पन्न होती है और यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की असामान्य प्रतिक्रिया से जुड़ी होती है। इससे अंगों को क्षति पहुंच सकती है। वहीं, सैप्टिक शॉक सैप्सिस का गंभीरतम रूप होता है, जिसमें मरीज का रक्तचाप खतरनाक रूप से कम हो जाता है और अंगों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।
क्या है स्क्रब टाइफस?
डॉक्टरों के अनुसार, स्क्रब टाइफस (जिसे बुश टाइफस भी कहा जाता है) एक संक्रामक रोग है, जो Orientia tsutsugamushi नामक बैक्टीरिया से होता है। यह संक्रमण चिगर (एक प्रकार का घुन) के काटने से फैलता है। चिगर के काटने के 10 से 12 दिन के भीतर इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। लक्षणों में तेज बुखार (जो 104-105 डिग्री तक जा सकता है), सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी आदि शामिल हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी अंग विफलता और मृत्यु तक का कारण बन सकती है।
बरसात के मौसम में खतरा ज्यादा
हिमाचल प्रदेश में 15 जून से 15 अक्टूबर तक बरसात का मौसम रहता है। इस दौरान खेतों और बाग-बागीचों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को स्क्रब टाइफस का अधिक खतरा होता है, क्योंकि चिगर गीली मिट्टी और झाड़ियों में पाए जाते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और सावधानी बरतने की सलाह दी है।
बचाव के उपाय
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, स्क्रब टाइफस से बचाव के लिए निम्न सावधानियाँ जरूरी हैं,खेतों और झाड़ियों में काम करते समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। शरीर पर कीटनाशक या मच्छर भगाने वाले लोशन का प्रयोग करें। घर और आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई बनाए रखें। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें, विशेषकर झाड़ियों और नमी वाले स्थानों पर। बुखार या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
प्रदेश में स्क्रब टाइफस को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर पहचान और इलाज से इस जानलेवा बीमारी से बचा जा सकता है।



