
क्रिकेट में जीत सिर्फ बल्ले और गेंद से नहीं मिलती, कई बार आस्था और आत्मबल भी उतनी ही अहम भूमिका निभाते हैं। कुछ ऐसा ही देखने को मिला इंग्लैंड के खिलाफ ओवल में खेले गए पांचवें और आखिरी टेस्ट मैच में, जहां शुरुआती संकट के बावजूद भारतीय टीम ने जबर्दस्त वापसी करते हुए मुकाबला जीत लिया। इस जीत के पीछे सिर्फ खिलाड़ियों की मेहनत ही नहीं, बल्कि ड्रेसिंग रूम में गूंजता एक विशेष मंत्र भी अहम कारण बना — ‘श्री शिव रुद्राष्टकम्’।
मैच के पहले दिन जब भारतीय पारी महज 38 रन पर दो विकेट खोकर संकट में थी, तब ड्रेसिंग रूम का माहौल भी बाहर के बादलों की तरह भारी था। इसी बीच भारतीय टीम के थ्रो डाउन स्पेशलिस्ट रघु ने स्पीकर ऑन किया और गूंज उठा –
“नमामीशमीशान निर्वाणरूपम्, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम्…”
यह था – श्री शिव रुद्राष्टकम्।
श्रीराम की परंपरा से प्रेरणा, खिलाड़ियों में जागी ऊर्जा
इस मंत्र का प्रभाव ऐसा हुआ कि खिलाड़ियों ने खुद को एक अलग ऊर्जा से भरपूर महसूस किया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, रघु के इस कदम ने ड्रेसिंग रूम में मौजूद सभी खिलाड़ियों को श्रीराम के रावण-विजय की उस पौराणिक कथा की याद दिला दी, जब प्रभु श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई से पहले रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना कर रुद्राष्टकम् का पाठ किया था।
एक टीम सदस्य के अनुसार, “हम अक्सर प्रैक्टिस के समय स्पीकर पर हनुमान चालीसा सुनते हैं, लेकिन पूरे टेस्ट के दौरान श्री शिव रुद्राष्टकम् सुनना पहली बार था। मैं ये नहीं कह रहा कि जीत सिर्फ इसकी वजह से मिली, लेकिन इस मंत्र से जो ऊर्जा आई, वो असाधारण थी।”
हर दिन गूंजता रहा रुद्राष्टकम्, बनी आदत
ओवल टेस्ट के पूरे पांच दिनों तक हर सुबह, हर सेशन से पहले ड्रेसिंग रूम में श्री शिव रुद्राष्टकम् गूंजता रहा। खिलाड़ियों ने इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया और कहा जाता है कि इससे उनमें एक अदृश्य आत्मबल जागृत हुआ। इस आध्यात्मिक माहौल ने टीम को मानसिक रूप से इतना मजबूत बना दिया कि वो मैदान पर परिस्थितियों से लड़ने में सफल रहे।
कार और घरों तक पहुंचा मंत्र
अब यह मंत्र ड्रेसिंग रूम की दीवारों तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई खिलाड़ी अब अपनी कारों, घरों और व्यक्तिगत जीवन में भी इसे सुन रहे हैं और अपने परिवार को भी इसका महत्व बता रहे हैं।
सीरीज का रोमांचक अंत: 2-2 से ड्रॉ
इस पृष्ठभूमि में भारत ने टेस्ट सीरीज का रोमांचक अंत किया। लीड्स में पहला टेस्ट हारने के बाद भारत ने बर्मिंघम में जोरदार वापसी की। लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे टेस्ट में करीबी हार ने सीरीज को फिर से पलट दिया। मैनचेस्टर टेस्ट ड्रॉ रहा और अंत में ओवल में भारत ने लगातार पांच दिन दबाव में रहकर मैच को न सिर्फ बचाया बल्कि जीत लिया। इसके साथ ही पांच मैचों की सीरीज 2-2 से ड्रॉ हो गई।
इस ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज का आखिरी मैच भारत की खेल भावना, मानसिक दृढ़ता और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बन गया। ड्रेसिंग रूम में गूंजता ‘श्री शिव रुद्राष्टकम्’ केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि टीम इंडिया के लिए प्रेरणा, आत्मबल और विश्वास का स्रोत बन गया – जिसने एक हारते हुए मैच को जीत में बदलने की नींव रखी।



