
सैंज घाटी की ग्राम पंचायत रैला के शरण गांव में बीस साल बाद एक बार फिर भूस्खलन का संकट मंडरा गया है। गांव के पीछे हो रहे तेज भू-स्खलन को देखते हुए प्रशासन ने 12 परिवारों को उनके घरों से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया है। पीड़ितों ने अस्थायी तौर पर रिश्तेदारों और गांव के अन्य लोगों के घरों में शरण ली है, जबकि मवेशियों के लिए तिरपाल और गोशालाओं की व्यवस्था की गई है।
एनएचपीसी की डंपिंग बना खतरे की जड़
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह संकट एनएचपीसी की पार्वती परियोजना के दौरान की गई अवैध मलबा डंपिंग के कारण पैदा हुआ है। वर्षों पहले डंप किया गया मलबा अब धीरे-धीरे गांव की ओर खिसकने लगा है, जिससे जमीन, पेड़-पौधों और घरों को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
स्थानीय निवासी खेलू राम, लोतम राम, देव राज और आशु नेगी ने प्रशासन से इस डंपिंग की जांच करवाने और स्थायी समाधान की मांग की है।
प्रशासन और पंचायत कर रहे राहत कार्य
एसडीएम बंजार पंकज शर्मा ने बताया कि प्रभावित परिवारों के लिए तिरपाल, सुरक्षित आश्रय और भूस्खलन की रोकथाम के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। साथ ही लोक निर्माण विभाग को इस पर त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।
रैला पंचायत प्रधान खिला देवी ने कहा कि पंचायत ने पहले ही प्रशासन को प्रस्ताव भेजकर इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि अब प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता और सुरक्षित पुनर्वास की आवश्यकता है।
2001-02 की यादें फिर हुईं ताज़ा
स्थानीय निवासी लोतम राम बताते हैं कि यह दूसरी बार है जब उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा है। वर्ष 2001-02 में भी एनएचपीसी परियोजना के लिए सड़क निर्माण के दौरान पत्थर गिरने से उन्हें बेघर होना पड़ा था। तब केवल एक-दो लाख रुपये की मामूली मुआवज़ा राशि देकर उन्हें छोड़ दिया गया था।
प्रभावित परिवारों की हालत दयनीय
वर्तमान में प्रभावित परिवारों को न सिर्फ आवासीय संकट, बल्कि अपनी खेती-बाड़ी और मवेशियों के लिए भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खेतों और बागानों को नुकसान पहुंचा है, जिससे आजीविका पर भी संकट गहराया है।



