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कुल्लू दशहरे में बजेगा वैश्विक संस्कृति का रंगारंग राग,रूस से श्रीलंका तक, विदेशी कलाकार सजाएंगे देवभूमि की सांस्कृतिक महफिल

कुल्लू,देवभूमि हिमाचल की वादियों में एक बार फिर संस्कृति, कला और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। कुल्लू दशहरा 2025 इस बार सिर्फ धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक सहभागिता का उत्सव बनने जा रहा है। इस ऐतिहासिक पर्व पर भारत की देव संस्कृति के साथ-साथ विदेशी लोक कला, संगीत और नृत्य का रंगारंग मिश्रण मंच और परेड में दिखाई देगा।

विदेशी कलाकारों का दिखेगा खास जलवा ,कुल्लू दशहरे के आयोजन में इस वर्ष रूस, नेपाल, थाईलैंड, श्रीलंका और आर्मेनिया जैसे देशों से लोक कलाकारों की टीमें भाग लेंगी। रूस के पारंपरिक और ऊर्जा से भरपूर लोक नृत्य,नेपाल के मादल की थाप, थाईलैंड की नृत्य मुद्राएं, श्रीलंका के ढोल वादनऔर आर्मेनिया के लोक संगीत की अनूठी प्रस्तुतियां इस बार दशहरे के मंच को वैश्विक रंगों से भर देंगी।

स्थानीय-वैश्विक संगम से सजेगी सांस्कृतिक परेड
जब कुल्लू की परंपरागत ढोल-नगाड़ों की गूंज विदेशी बांसुरी, ड्रम और अन्य वाद्य यंत्रों की ताल से मिलेगी, तो यह एक ऐसा राग और रस रचेगा जो दर्शकों के मन को छू जाएगा। यह परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मिलन होगा, जिसमें कुल्लू की सांस्कृतिक आत्मा एक वैश्विक मंच पर अपनी छवि दिखाएगी।

नई तकनीक और नई सोच का समावेश
आयोजन समिति के अनुसार, इस बार का कुल्लू दशहरा कुछ मायनों में पिछले वर्षों से अलग और भव्य होगा:
मंच पर आधुनिक लाइटिंग, ऑडियो-वीडियो इफेक्ट्स और स्मार्ट प्रस्तुति तकनीकों का उपयोग होगा। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ विदेशी तकनीक का अद्भुत मेल दर्शकों को नया अनुभव देगा। विदेशी मंडलियों की संख्या में इस बार इजाफा होने की उम्मीद है।

राजनीतिक सहयोग और समन्वय से बढ़ेगी भागीदारी
कुल्लू के विधायक और आयोजन से जुड़े अधिकारी इस बार विदेश कलाकारों की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठकों में जुटे हैं। उद्देश्य है कि अधिक देशों की सहभागिता सुनिश्चित कर इस महापर्व को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक पहचान दिलाई जाए।

कुल्लू दशहरा: परंपरा, पर्यटन और पहचान का पर्व
कुल्लू दशहरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान, पर्यटन को बढ़ावा देने और वैश्विक जुड़ाव का सशक्त मंच बन गया है। इस वर्ष होने वाले आयोजन से जहां स्थानीय शिल्प, संगीत और संस्कृति को वैश्विक दर्शक मिलेंगे, वहीं विदेशी कलाकारों को भारतीय परंपरा का अनुभव होगा।

Kullu Update
Author: Kullu Update

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