
धर्मशाला/पठानकोट: हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरोगेज रेलवे लाइन अब एक बड़े परिवर्तन की दहलीज पर खड़ी है। लगभग 97 साल पुरानी इस रेललाइन को अब ब्रॉडगेज में बदलने की योजना पर काम शुरू हो चुका है। रेलवे मंत्रालय ने इस बदलाव के लिए गूगल आधारित सर्वेक्षण की शुरुआत कर दी है, जो सितंबर 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है।
इसके बाद यह मामला रेलवे बोर्ड के पास जाएगा और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो आने वाले वर्षों में यह लाइन हिमाचल प्रदेश के पर्यटन, रक्षा और परिवहन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
इतिहास से वर्तमान तक: भारत की सबसे लंबी नैरोगेज लाइनों में शामिल
पठानकोट से जोगिंद्रनगर तक 164 किलोमीटर लंबी यह लाइन भारत की सबसे लंबी 2 फीट 6 इंच (762 मिमी) नैरोगेज रेललाइन है। 1926 से 1928 के बीच अंग्रेजों के शासनकाल में बनी यह रेलवे लाइन 950 पुलों, 2 सुरंगों और लगभग 500 मोड़ों से होकर गुजरती है। यह ना केवल कांगड़ा घाटी की जीवनरेखा है, बल्कि तकनीकी और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
करीब एक सदी से यह रेललाइन कांगड़ा और आसपास के 30 लाख से ज्यादा लोगों के लिए यात्रा और माल ढुलाई का प्रमुख साधन रही है।
प्राकृतिक आपदाओं और रखरखाव की कमी से बिगड़ी स्थिति ,हाल के वर्षों में इस रेलवे लाइन की हालत भूस्खलन, बाढ़ और रखरखाव की कमी के चलते लगातार खराब होती गई है। चक्की पुल, जो तीन साल पहले बाढ़ में बह गया था, अब तक दोबारा चालू नहीं हो पाया है। इसके अलावा, कई अन्य पुल और सुरंगें भी क्षतिग्रस्त या जर्जर स्थिति में हैं। रेल सेवाओं के बार-बार बाधित होने से यात्रियों को बसों और निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे यात्रा समय बढ़ा है और असुविधा भी।
ब्रॉडगेज परिवर्तन: हिमाचल के भविष्य की कुंजी
इस स्थिति को देखते हुए, विशेषज्ञों और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों का मानना है कि लाइन की मरम्मत पर खर्च करने की बजाय इसे ब्रॉडगेज में बदलना अधिक व्यावहारिक और दूरदर्शी विकल्प होगा। इससे न केवल यात्री संख्या में भारी इजाफा होगा, बल्कि माल ढुलाई भी अधिक प्रभावी और तेज हो सकेगी।
साथ ही, यह परिवर्तन कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार के साथ मिलकर क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए एक सुलभ पर्यटन केंद्र बना सकता है।
सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज की पहल
इस महत्वपूर्ण मुद्दे को लोकसभा और रेलवे मंत्रालय के समक्ष कांगड़ा-चंबा से सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने मजबूती से उठाया है। उन्होंने बताया कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उनकी मांग को गंभीरता से लेते हुए सर्वेक्षण की प्रक्रिया आरंभ करवा दी है।
डॉ. भारद्वाज ने कहा:
यह परियोजना केवल हिमाचल प्रदेश के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों के लिए भी अहम है। ब्रॉडगेज लाइन से सेना की लॉजिस्टिक सप्लाई, आपदा प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।”
उन्होंने आशा जताई कि सर्वेक्षण के पूरा होने के बाद डीपीआर समेत आगे की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी।
सामरिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम
इस रेलवे लाइन का सामरिक महत्व भी कम नहीं है। सीमावर्ती राज्य होने के नाते हिमाचल प्रदेश में सेना की मूवमेंट और सप्लाई के लिहाज से मजबूत रेल कनेक्टिविटी बेहद जरूरी है। ब्रॉडगेज परिवर्तन से सेना की आवाजाही सुगम होगी और रक्षा जरूरतों की पूर्ति भी बेहतर तरीके से हो पाएगी।
पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे लाइन का ब्रॉडगेज में रूपांतरण सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक और सामरिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि यह योजना पूरी तरह से साकार होती है, तो आने वाले वर्षों में यह रेललाइन हिमाचल के विकास की नई धड़कन बन सकती है।



