
बद्दी (सोलन): हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में सोमवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कैलाश विहार स्थित विनर निप्पॉन लेदरेट प्राइवेट लिमिटेड नामक फैक्टरी में अचानक भीषण आग भड़क उठी। यह फैक्टरी पॉलीयूरीथेन और प्लास्टिक पीवीसी जैसे अत्यधिक ज्वलनशील तकनीकी वस्त्रों का निर्माण करती है।
आग की सूचना रात करीब 10:30 बजे अग्निशमन विभाग को मिली, जिसके बाद बद्दी फायर स्टेशन से तुरंत तीन दमकल वाहनों और 11 कर्मचारियों की टीम मौके पर रवाना की गई। डेढ़ घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन, 20 लाख की संपत्ति को बचाया
दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आग फैक्टरी के मैन्युफैक्चरिंग सेक्शन से शुरू हुई और मिनटों में तेजी से फैल गई। हालांकि करीब डेढ़ घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रात 12 बजे तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया।
दमकल कर्मियों की तेजी और सतर्कता से करीब 20 लाख रुपए की संपत्ति को जलने से बचा लिया गया, जिससे बड़ा आर्थिक नुकसान टल गया।
कोई जनहानि नहीं, पर फैक्टरी को भारी नुकसान
गनीमत रही कि घटना के समय फैक्टरी में मौजूद कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे और कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि, शुरुआती आकलन के मुताबिक, करीब 50 लाख रुपए की संपत्ति जलकर खाक हो चुकी है।
आग के कारणों की जांच जारी
फिलहाल, आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें आग के स्रोत और संभावित लापरवाही की जांच कर रही हैं। फैक्टरी में मौजूद ज्वलनशील सामग्री के चलते आग का खतरा पहले से बना हुआ था, जिसे देखते हुए अब सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जा रही है।
अधिकारियों का बयान
होम गार्ड कमांडेंट सोलन संतोष शर्मा ने जानकारी देते हुए कहा,
“फैक्टरी में अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री थी, लेकिन दमकल विभाग ने तेजी और समन्वय से काम किया और स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण पाया। यदि थोड़ी सी भी देर होती, तो नुकसान और बड़ा हो सकता था।”
स्थानीय प्रशासन और उद्योगों को चेतावनी
यह घटना औद्योगिक इकाइयों के लिए एक चेतावनी भी है कि फैक्टरियों में आग सुरक्षा उपायों का पालन और फायर ड्रिल्स जैसी तैयारियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सख्ती से निरीक्षण और नियम लागू करने की आवश्यकता है।
बद्दी की इस घटना ने दिखा दिया कि आग जैसी आपदा में तत्परता और कुशलता से बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। हालांकि 50 लाख रुपए का नुकसान कम नहीं, लेकिन समय पर मिली सूचना और दमकल विभाग की मुस्तैदी ने एक बड़े औद्योगिक हादसे को टाल दिया।



