
शिमला, हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पिछले 24 घंटों से जारी मूसलधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर में भूस्खलन, पेड़ों के गिरने, और सड़कों के बंद होने की अनेक घटनाएं सामने आई हैं। प्रशासन के अनुसार अब तक 10 से अधिक पेड़ गिर चुके हैं, जबकि 8 गाड़ियां मलबे में दब गई हैं।

जगह-जगह मलबा और जलभराव
शहर के खलीनी क्षेत्र में मिस्ट चैंबर के पास एक विशाल पेड़ के गिरने से मुख्य सड़क पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। आईजीएमसी अस्पताल के पास सर्कुलर रोड पर नाले का पानी और मलबा बहकर सड़क पर आ गया, जिससे कुछ गाड़ियां सीधे मलबे में दब गईं और सड़क पूरी तरह बंद हो गई।
कनलोग, अपर ढली, मज्याठ, और विकासनगर पेट्रोल पंप जैसे क्षेत्रों में भूस्खलन की खबरें हैं, जिससे कई संपर्क मार्गों पर ट्रैफिक रुक गया है।
मुख्यमंत्री आवास के पास भी खतरा
यहां तक कि मुख्यमंत्री आवास ओकओवर के पास भी देवदार का एक विशाल पेड़ गिर गया, जो इलाके की संवेदनशीलता और प्रशासन की चिंता का विषय है।
घरों पर गिर रहे पेड़, खतरे में जान-माल
हरि नंद कॉलोनी, झंझीड़ी में सुखराम शर्मा के घर पर एक सूखा देवदार का पेड़ गिर गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पेड़ को काटने की मंजूरी के लिए एक साल पहले आवेदन किया गया था, लेकिन अनुमति नहीं मिली। अब, जब पेड़ गिरा तो मकान को नुकसान हुआ है। यहां कई अन्य सूखे पेड़ भी गिरने की कगार पर हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल है।
जुब्बल में स्कूल बंद, रामपुर में भी नुकसान
उपमंडल जुब्बल में लगातार बारिश और भूस्खलन को देखते हुए प्रशासन ने सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का आदेश दिया है। वहीं रामपुर के गानवी क्षेत्र में कई भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं, सड़कें टूटी हैं, और बिजली तथा पेयजल आपूर्ति भी बाधित हो गई है।
चाबा पेयजल योजना भी प्रभावित
बारिश के चलते चाबा पेयजल योजना में गाद भर गई है, जिससे शहर में जलापूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है। विभागों ने स्थिति से निपटने के लिए टीमें तैनात कर दी हैं, लेकिन भारी बारिश से राहत मिलने तक स्थिति गंभीर बनी रहेगी।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे,अनावश्यक यात्रा से बचें, भूस्खलन संभावित इलाकों में न जाएं,सूखे पेड़ों के नीचे वाहन खड़े न करें,किसी भी आपात स्थिति में 1077 (आपदा नियंत्रण कक्ष) या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करें,शिमला में बारिश ने एक बार फिर दिखा दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति लापरवाही जानलेवा हो सकती है। प्रशासन के सतर्क प्रयासों के बावजूद बुनियादी ढांचे पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में आमजन से सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।



