
शिमला, हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशे के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए विधानसभा में दो अहम विधेयक पारित किए हैं, जिनमें नशा तस्करों के लिए मृत्युदंड, आजीवन कारावास, 10 लाख रुपए तक जुर्माना, और संपत्ति जब्ती जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही नशे के पुनर्वास, निवारक शिक्षा और आजीविका सहायता के उपाय भी कानून का हिस्सा बनाए गए हैं।
स्वास्थ्य एवं सामाजिक न्याय मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने बुधवार को राजधानी शिमला में आयोजित नशामुक्त भारत अभियान के शपथ समारोह में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि नशे की समस्या को जड़ से समाप्त करना है।
सामूहिक शपथ अभियान की शुरुआत
नशामुक्त भारत अभियान के तहत पूरे प्रदेश में 1 से 31 अगस्त तक सामूहिक शपथ अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में शिमला के कोटशेरा कॉलेज, संजौली कॉलेज, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय समेत विभिन्न संस्थानों के एनएसएस, एनसीसी और स्काउट एंड गाइड के छात्रों को नशामुक्त भारत की शपथ दिलाई गई।
इस अभियान में सचिवालय के अधिकारी, ज्ञान-विज्ञान समिति, नशामुक्त भारत अभियान से जुड़े पदाधिकारी, और सामाजिक न्याय विभाग के कर्मचारी भी शामिल रहे।
अब तक की बड़ी कार्रवाई
डॉ. शांडिल ने बताया कि प्रदेश पुलिस ने पीआईटी एनडीपीएस एक्ट को सख्ती से लागू किया है। इसके अंतर्गत अब तक:
42 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति जब्त की गई,70 तस्करों की संपत्ति चिन्हित की गई
44 कुख्यात तस्करों को हिरासत में लिया गया
यह कार्रवाई दर्शाती है कि प्रदेश सरकार नशे के कारोबार को पूरी तरह जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्या-क्या है नए कानून में?
मृत्युदंड या आजीवन कारावास का प्रावधान
10 लाख रुपए तक का जुर्माना ,तस्करों की संपत्ति की जब्ती,पुनर्वास और काउंसलिंग सेंटरों का विस्तार,स्कूल-कॉलेजों में नशा विरोधी शिक्षा को बढ़ावा
आजीविका सहायता – पुनर्वास के बाद रोज़गार के अवसर प्रदान करना
जनभागीदारी होगी अहम
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार अकेले नशे की समस्या को नहीं सुलझा सकती। इसके लिए जनसहभागिता अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं, माता-पिता, शिक्षकों और समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे इस अभियान से जुड़ें और एक नशामुक्त हिमाचल के निर्माण में भागीदार बनें।
हिमाचल सरकार का यह नया कानून न केवल तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का माध्यम बनेगा, बल्कि नशे के दलदल में फंसे लोगों को पुनर्वास की दिशा में एक नई राह भी दिखाएगा। अगस्त महीने में चल रहे सामूहिक शपथ अभियान से यह संदेश साफ है कि प्रदेश अब नशे के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार है।



