
सुंदरनगर, हिमाचल प्रदेश में बारिश और भूस्खलन से बार-बार हो रहे नुकसान को देखते हुए शिक्षा विभाग ने शिक्षण संस्थानों के भवन निर्माण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब सभी स्कूल और कॉलेज नदी-नालों से दूर बनाए जाएंगे। यह जानकारी राज्य के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने सराज के आपदाग्रस्त क्षेत्रों के दौरे के बाद सुंदरनगर में दी।
हिमुडा को सौंपी जाएगी निर्माण जिम्मेदारी
शिक्षा मंत्री ने कहा कि जो संस्थान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, उनका निर्माण हिमुडा (HIMUDA) के माध्यम से किया जाएगा, लेकिन यह काम शिक्षा विभाग की अनुशंसा के आधार पर होगा। बरसात समाप्त होते ही पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
इस साल 523 शिक्षण संस्थान प्रभावित
शिक्षा मंत्री ने बताया कि 2025 की मानसून आपदा में प्रदेश के 523 शिक्षण संस्थान प्रभावित हुए हैं, जिनमें 300 से अधिक संस्थान मंडी जिले में हैं।
इनमें से:
109 संस्थान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए
29 पूरी तरह तबाह संस्थान मंडी जिले में हैं
पुनर्निर्माण कार्य को दो चरणों में किया जाएगा:
पहले चरण में पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त संस्थानों का निर्माण
दूसरे चरण में आंशिक रूप से प्रभावित संस्थानों का पुनर्सुधार
इसके लिए 16 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें से 9 करोड़ मंडी जिला के लिए प्रस्तावित हैं।
नदी-नालों के किनारे स्थित संस्थानों की होगी पहचान
शिक्षा विभाग अब प्रदेश भर में नदी और खड्डों के किनारे बने स्कूल-कॉलेजों की सूची तैयार करेगा। इससे समय रहते रिलोकशन या सुरक्षा उपाय किए जा सकें। विशेष रूप से शिक्षा मंत्री ने लंबाथाच डिग्री कॉलेज का ज़िक्र करते हुए बताया कि यह खड्ड के किनारे स्थित है, और इसे सुरक्षित करने के लिए 6 करोड़ रुपए की लागत से बाउंड्री वॉल का निर्माण आवश्यक है। इसके लिए डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर वर्ल्ड बैंक से अनुमोदन लिया जाएगा।
पदों की भरती प्रक्रिया में तेजी
शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अब तक शिक्षा विभाग में 6000 पदों को भरा है।
प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापक और पीजीटी की पदोन्नति सूची जल्द जारी होगी
इसके बाद जेबीटी और अन्य श्रेणियों की लिस्ट भी जारी की जाएगी
फोरलेन के कारण प्रभावित स्कूलों पर भी नजर
सुंदरनगर क्षेत्र में कीरतपुर-मनाली फोरलेन के चलते प्रभावित हुए स्कूलों की स्थिति की समीक्षा के लिए शिक्षा निदेशक और मंडी के उपनिदेशक को निर्देश दिए गए हैं।
पिछली आपदा में भी हुआ था भारी नुकसान
2023 की आपदा में प्रदेश के शिक्षण संस्थानों के पुनर्निर्माण पर 37 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। मंडी जिले पर अकेले 11 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की घोषणाओं से स्पष्ट है कि हिमाचल सरकार शिक्षण संस्थानों को सुरक्षित और आपदा-रोधी बनाने को लेकर गंभीर है।
नई नीति से न केवल संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि बच्चों और शिक्षकों की जान-माल की हिफाजत भी सुनिश्चित होगी।



