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बादल फटने से तीर्थन घाटी में ट्राउट मत्स्य पालन पर संकट

कुल्लू अपडेट,हिमाचल प्रदेश की तीर्थन घाटी, जो हाल ही में ट्राउट मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक नया केंद्र बनती जा रही थी, अब प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रही है। क्षेत्र में बार-बार बादल फटने और भयंकर बाढ़ की घटनाओं के चलते ट्राउट मत्स्य पालन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। घाटी में स्थित हामणी का सरकारी ट्राउट मत्स्य केंद्र, जहां से पूरे क्षेत्र में बीज मछलियों की आपूर्ति की जाती है, बाढ़ के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस केंद्र की मछलियों से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय में लगातार आई प्राकृतिक आपदाओं ने इस व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है।

प्राकृतिक आपदाओं का असर सिर्फ सरकारी फार्म तक सीमित नहीं रहा। निजी ट्राउट मत्स्य पालकों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा है। वर्ष 2023 में आई बाढ़ में करीब 12 से 15 ट्राउट पालकों की मछलियों और संरचनाओं को इतना नुकसान हुआ कि उन्होंने मत्स्य पालन का कार्य छोड़ दिया।

फलाचन नाला और तीर्थन नदी में हाल ही में बादल फटने की घटनाओं ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। तेज बहाव और मलबे के कारण तालाब बह गए, उपकरण नष्ट हो गए और सैकड़ों मछलियाँ बह गईं।

कुछ वर्ष पहले तक यह घाटी ट्राउट मत्स्य पालन में एक संभावनाओं से भरा क्षेत्र बन रही थी और बड़ी संख्या में लोग इस व्यवसाय से जुड़ने लगे थे। लेकिन बार-बार हो रहे प्राकृतिक नुकसान के कारण अब लोगों की इसमें रुचि कम होती जा रही है।

Kullu Update
Author: Kullu Update

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