Search
Close this search box.

झूले में विराजमान हुए देव श्रीबड़ा छमाहूं,सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने झूला खींच कमाया पुण्य


कुल्लू अपडेट, विष्णु अवतार देव श्रीबड़ा छमाहूं झूले में विराजमान हुए और सैंकड़ों भगतों ने देव श्रीबड़ा छमाहूं को झूला झुलाकर पूण्य कमाया। यह भव्य कार्यक्रम देवता के मुख्य मंदिर सराज घाटी के दलयाड़ा गांव में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आयोजित हुआ। देवता के पुजारी धनेश गौतम ने बताया कि यहां देव रथ को चांदी के बने बड़े झूले में बिठाया जाता है और लोग बड़े हर्षोल्लास के साथ कृष्णा जन्माष्टमी मनाते हैं। जैसे ही 12 बजे कृष्ण जन्म होता है तो सभी परंपराएं शुरू हो जाती है। गौर रहे कि देव श्रीबड़ा छमाहूं सृष्टि के निर्माता है और विष्णु अवतार के साथ देव रथ में ब्रह्मा विष्णु के अलावा ब्रह्मा,विष्णु,महेश,आदी,शक्ति शेष भी विराजमान है।

सनद रहे कि विष्णु भगवान ने ही धरती पर 24 अवतार लिए हैं जिसमें भगवान कृष्ण का आठवां अवतार है। इसलिए देव श्रीबड़ा छमाहूं को ही विष्णु के अलावा भगवान राम,भगवान कृष्ण माना जाता है और इस अवतार में भगवान शेषनाग व शक्ति स्वरूप लक्ष्मी उनके साथ हमेशा रहती है और ब्रह्म व महेश भी उनके अवतार में समय-समय पर भगवान विष्णु का सहयोग करते हैं। यही कारण है कि देव श्रीबड़ा छमाहूं को सृष्टि का निर्माता कहा गया है और देव रथ में छह शक्तियों ब्रह्मा,विष्णु,महेश,आदी अंनत,शक्ति व शेषनाग समाहित होकर वास करते हैं।

छह शक्तियों के स्वामी को इसीलिए छमाहूं कहा जाता है अर्थात छह देवों की सामूहिक शक्ति। यह स्वरूप भगवान विष्णु ने महाप्रलय के बाद सृष्टि की पुनः रचना के दौरान सामने लाया था और छह शक्तियों के मिलन से सृष्टि की पुनः रचना की थी। भगवान विष्णु सृष्टि की पुनः निर्माण के लिए ब्रह्म,महेश, आदी, शक्ति व शेष को अपने में समाहित कर छमाहूं अवतार लिया था और सृष्टि का निर्माण किया था।

देव श्रीबड़ा छमाहूं को सराज घाटी का अधिष्ठाता देव माना जाता है और दलयाड़ा गांव में देवता का मुख्य मंदिर हैं। इसलिए यह भव्य आयोजन इसी मंदिर में आयोजित हुआ और रात 12 बजे से लेकर दूसरे दिन चार बजे तक श्रद्धालु देवता को झूला झुलाकर पूण्य कमाते रहे। इस दौरान यहां भव्य भोज का भी आयोजन हुआ। इस वर्ष इस भव्य आयोजन में देवता पल्दी छमाहूं व देवता धामणी छमाहूं भी विराजमान रहे।

Kullu Update
Author: Kullu Update

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज