
हिमाचल प्रदेश में मानसून के प्रकोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंडी जिले में भारी बारिश और भूस्खलन के चलते विद्युत आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है। थलौट और गोहर क्षेत्रों में ब्लैकआउट जैसी स्थिति पैदा हो गई है, जहां बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है।
244 ट्रांसफार्मरों के बंद होने से 19 से अधिक पंचायतें अंधेरे में डूबी हुई हैं। पिछले 48 घंटों से कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तीर्थन घाटी में भारी तबाही
थलौट डिवीजन के अधिशाषी अभियंता जीतेंद्र ने बताया कि तीर्थन क्षेत्र की बठाल की चार पंचायतों में बादल फटने के कारण भारी नुकसान हुआ है। ट्रांसफार्मर और विद्युत पोल पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। इन पंचायतों में विद्युत आपूर्ति बहाल करने में कुछ और समय लग सकता है।
सैंज और पराशर क्षेत्र भी प्रभावित
थलौट डिवीजन के सैंज क्षेत्र की सात पंचायतें भी प्रभावित हैं।
वहीं, गोहर डिवीजन में 42 ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं और कर्मचारी दिन-रात विद्युत बहाली के कार्य में जुटे हुए हैं।
मंडी डिवीजन के अधिशाषी अभियंता राजेश कौंडल ने बताया कि 32 ट्रांसफार्मरों के बंद होने से बागी, शेगली और पराशर की चार पंचायतों में बिजली आपूर्ति ठप है।
मंडी नगर निगम के आउटर वार्ड जैसे भ्यूली, बेहना, तत्याहड़ और नेला में चार घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही, जिससे शहरी क्षेत्र भी अछूते नहीं रहे।
राज्य भर में मानसून का भारी असर
हिमाचल प्रदेश में 20 जून से 18 अगस्त 2025 के बीच मानसून ने भारी तबाही मचाई है।
अब तक 268 लोगों की मौत हो चुकी है।
37 लोग लापता हैं, जबकि 336 लोग घायल हुए हैं।
राज्य को इस आपदा में अब तक 2194 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
सोमवार शाम 6 बजे तक प्रदेश में
2 राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और
387 सड़कों पर यातायात पूरी तरह बंद है।
760 बिजली ट्रांसफार्मर बंद हैं।
186 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
हिमाचल प्रदेश खासकर मंडी जिला मानसून की मार से गंभीर संकट में है। बुनियादी सुविधाएं ठप होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। प्रशासन और विद्युत विभाग बिजली बहाली के लिए निरंतर प्रयासरत हैं, मगर प्राकृतिक आपदाओं के चलते चुनौती बड़ी है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति सामान्य होने पर ही राहत की उम्मीद की जा सकती है।



