
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में साइबर ठगों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय पाया गया है, जो लोगों को केवाईसी अपडेट, बैंक खाते में गलती से पैसे भेजने जैसे झांसे देकर ठगी कर रहा था। मंडी पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देश के सात राज्यों—जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश—से ऑपरेट हो रहा था।
इस बात का खुलासा तब हुआ जब सदर और औट थाना क्षेत्रों में साइबर ठगी के पांच मामले सामने आए। इन मामलों की गहराई से जांच करते हुए मंडी पुलिस ने ठगों के नेटवर्क को ट्रेस किया और 4.30 लाख रुपये की राशि पीड़ितों को वापस दिलवाई। फिलहाल करीब 80 हजार रुपये की और रिकवरी प्रक्रिया में है।
कैसे काम करता था ठगों का गिरोह?
ठग लोगों को बैंक खाते में गलती से पैसे भेजने का नाटक, या फिर मोबाइल नंबर या बैंक खातों की केवाईसी अपडेट करवाने जैसे फर्जी कॉल्स करते थे। लोग झांसे में आकर लिंक पर क्लिक कर बैठते या ओटीपी साझा कर देते, जिससे ठग उनके खाते खाली कर देते थे।
पुलिस की सक्रियता और टीम का गठन
मंडी पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें साइबर अपराधों की जांच और रिकवरी पर विशेष जोर दिया गया। इस टीम का नेतृत्व मुख्य आरक्षी मनोज ठाकुर (पुलिस चौकी शहर) को सौंपा गया। टीम में मुख्य आरक्षी घनश्याम ठाकुर (सदर थाना) और मुख्य आरक्षी सुभाष ठाकुर (पुलिस चौकी बालीचौकी) भी शामिल रहे।
टीम ने देश के विभिन्न राज्यों में ऑपरेशन चलाकर संदिग्ध साइबर ठगों की धरपकड़ की और पीड़ितों की रकम को ट्रेस कर उनके बैंक खातों में वापस भेजा।
दर्ज हुए मामले
सदर थाना में 3 मामले
औट थाना में 2 मामले
इन सभी मामलों में ठगी का पैटर्न एक जैसा रहा और आरोपी देश के विभिन्न हिस्सों से ऑपरेट कर रहे थे।
पुलिस की अपील
मंडी पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे
किसी अनजान नंबर से आए बैंक या केवाईसी संबंधित कॉल्स पर भरोसा न करें।
कोई भी ओटीपी, बैंक डिटेल या पर्सनल जानकारी साझा न करें।
अगर कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या नजदीकी थाने में रिपोर्ट करें।
मंडी पुलिस की सक्रियता से साइबर ठगों के जाल का पर्दाफाश हुआ है और लोगों की मेहनत की कमाई को वापस दिलवाना एक बड़ी उपलब्धि है। लेकिन इस तरह की ठगी से बचाव के लिए आम जनता को भी साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूक और सतर्क रहने की जरूरत है।



