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हिमाचल विधानसभा में आपदा पर गरमाई सियासत, केंद्र से विशेष राहत की उठी मांग

हिमाचल प्रदेश में आई भीषण प्राकृतिक आपदा को लेकर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। मानसून सत्र के दौरान आपदा राहत, नुकसान की भरपाई, केंद्र सरकार से सहायता और प्रशासनिक लापरवाही जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। जहां कांग्रेस विधायकों ने राज्य सरकार की सक्रियता और संवेदनशीलता की सराहना की, वहीं भाजपा विधायकों ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की धीमी गति और योजनाओं की खामियों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

सत्ता पक्ष: “सरकार हर प्रभावित के साथ खड़ी है”
धर्मपुर के कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश क्लाइमेट चेंज का सबसे बड़ा शिकार बन चुका है। उन्होंने एनएचएआई द्वारा की जा रही अवैज्ञानिक ब्लास्टिंग और सड़क निर्माण को आपदा के पीछे एक बड़ा कारण बताया और कहा कि कंपनियों द्वारा निर्माण कार्य के लिए स्थानीय प्रतिनिधियों और ग्राम सभाओं से अनिवार्य रूप से अनुमति ली जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा से डंगे निर्माण पर रोक लगाना केंद्र सरकार का गलत फैसला है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में और अधिक नुकसान हो रहा है। साथ ही उन्होंने एफसीए और एफआरए से राहत की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
भोरंज के विधायक सुरेश कुमार ने कहा कि सरकार सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभावितों को राहत देने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। उन्होंने जोर दिया कि सरकार भेदभाव नहीं कर रही, बल्कि हर पीड़ित के साथ खड़ी है।

विपक्ष: “आपदा में लापरवाही और राजनीति”
मंडी सदर से भाजपा विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि चर्चा केवल राहत कार्यों की नहीं, बल्कि आपदा के मूल कारणों की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाते समय तकनीकी पहलुओं को नजरअंदाज किया जाता है, जिससे योजनाएं आपदा का कारण बन जाती हैं।

चुराह से विधायक हंसराज ने कहा कि चंबा जिले में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है, लेकिन विधानसभा में चर्चा के दौरान कोई बड़ा अधिकारी मौजूद नहीं था, जिससे सरकार की गंभीरता पर सवाल उठते हैं।
भाजपा विधायक विनोद कुमार ने डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री द्वारा घोड़ा और गधे की तुलना पर तंज कसा और पूछा कि अगर उनका विभाग घोड़ा है तो “गधा कौन है”? उन्होंने बेघर हुए लोगों के लिए जमीन की उपलब्धता पर भी सवाल उठाया और कहा कि 7 लाख की राहत केवल कागजों तक सीमित है।

कांग्रेस विधायक केवल सिंह पठानिया का सवाल
उन्होंने आपदा राहत को लेकर सवाल उठाया कि जो पैसा आपदा के लिए आ रहा है, वह आखिर जा कहां रहा है? उन्होंने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही के चलते राहत कार्य समय पर शुरू नहीं हो पा रहे, जिससे प्रभावित जनता को समय पर सहायता नहीं मिल रही।

केंद्र सरकार से विशेष सहायता की मांग
बहस के दौरान केंद्र सरकार से विशेष वित्तीय सहायता और आपदा राहत के लिए अधिक संसाधनों की मांग भी उठी। विधायकों ने एकमत से कहा कि हिमाचल जैसी पहाड़ी राज्य के लिए स्थायी आपदा राहत ढांचे की जरूरत है, ताकि हर वर्ष आने वाली ऐसी आपदाओं से निपटा जा सके।

हिमाचल विधानसभा में आपदा को लेकर हुई बहस ने दिखा दिया कि प्राकृतिक आपदा केवल एक पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती भी है। जहां एक ओर सरकार अपनी कार्यप्रणाली को सही ठहरा रही है, वहीं विपक्ष तेजी और पारदर्शिता की मांग कर रहा है। अब देखना यह होगा कि इस बहस के बाद जमीनी स्तर पर कितनी राहत पहुंचती है, और केंद्र से क्या विशेष मदद मिलती है।

Kullu Update
Author: Kullu Update

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