
मानसून सत्र के पहले दिन भाजपा लाई ‘काम रोको प्रस्ताव’, मुख्यमंत्री सुक्खू की सहमति से हुआ स्वीकार
हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र तेज बारिश के बीच सोमवार को शुरू हुआ। पहले दिन ही सारा काम स्थगित करके प्राकृतिक आपदा पर चर्चा की शुरुआत हो गई। सबसे पहले कांग्रेस के चार विधायकों की ओर से नियम 130 के तहत प्रस्ताव बिजनेस में लगा था, लेकिन सदन शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और भाजपा विधायकों ने नियम 67 के तहत काम रोको प्रस्ताव दे दिया। विधानसभा में राष्ट्रगान के साथ कार्यवाही की शुरुआत हुई और सबसे पहले मुख्यमंत्री ने पूर्व विधायक गणेश दत्त भरवाल को लेकर शोकोद्गार रखे, जिसमें नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के अलावा चंद्र कुमार, सुदर्शन बबलू, राकेश कालिया, सतपाल सत्ती, विवेक शर्मा इत्यादि ने भाग लिया। इसके एकदम बाद प्रश्नकाल होना था, लेकिन विपक्षी दल के विधायकों ने आपदा की गंभीरता को देखते हुए सारा काम स्थगित करने को कहा।
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान ने तर्क दिया कि नियम 130 के तहत पहले ही यह मसला लगा है, उसी में भाजपा के विधायकों के नाम भी जोड़ दिए जाएं। इससे भी विपक्ष सहमत नहीं हुआ और जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार इस गंभीरता को समझे। भाजपा विधायक विपिन परमार और बिक्रम सिंह ठाकुर ने भी 67 का नोटिस पहले लेने को कहा। इस दौरान नेता जयराम ठाकुर और मुख्यमंत्री सुक्खू के बीच कई बार बहस हुई।
प्राकृतिक आपदा के प्रति संवेदनशील है प्रदेश सरकार
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि 2023 में भी सरकार ने प्राकृतिक आपदा के बाद प्रभावितों के पक्ष में प्रस्ताव लाया था, लेकिन समर्थन में वोट करने के बजाय भाजपा के विधायक वॉकआउट कर गए थे। आपदा किसी भी क्षेत्र में आए सरकार उसके प्रति संवेदनशील है। आज जो बिजनेस लगा है, उसके लिए भी सरकारी पैसा लगा होता है। फिर भी यदि विपक्ष चाहता है कि पहले आपदा पर ही चर्चा हो, तो सरकार उसके लिए भी तैयार है। वहीं, मुख्यमंत्री ने एक शर्त रखी कि इस चर्चा के दौरान विपक्ष कभी वॉकआउट नहीं करेगा। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष ने चर्चा की शुरुआत की। सोमवार को पूरा दिन यह चर्चा चली और मंगलवार को भी इसी मसले पर चर्चा होगी



