
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायती राज चुनाव प्रणाली को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने हिमाचल प्रदेश पंचायत राज (निर्वाचन) नियम, 1994 में संशोधन करते हुए “हिमाचल प्रदेश पंचायत राज (निर्वाचन) द्वितीय संशोधन नियम, 2025” अधिसूचित कर दिया है।
इस संशोधन के अनुसार, पंचायतों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षित पद अब रोटेशन आधार पर तय किए जाएंगे। यानी, हर पंचायती राज चुनाव में आरक्षण क्रमवार रूप से अलग-अलग पंचायतों और वार्डों में लागू किया जाएगा, जिससे लगातार एक ही पंचायत में आरक्षण लागू होने की असमानता को दूर किया जा सके।
किन नियमों में हुआ संशोधन?
संशोधन मुख्यतः नियम 28, 87, 88 और 89 में किया गया है। इसके तहत:
आरक्षण की प्रक्रिया अब हर चुनाव में रोटेशन के आधार पर लागू होगी।
यह प्रक्रिया ग्राम सभाओं से लेकर जिला परिषदों तक के सभी आरक्षित पदों पर लागू की जाएगी।
इससे पहले कई पंचायतों में लगातार एक ही वर्ग के लिए पद आरक्षित रहने की शिकायतें मिल रही थीं, जो अब समाप्त होंगी।
उद्देश्य क्या है?
सरकार के अनुसार, इस संशोधन का उद्देश्य:
पंचायती चुनावों में निष्पक्षता सुनिश्चित करना,
सभी वर्गों को समान अवसर देना,
और स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र की प्रभावशीलता बढ़ाना है।
इससे सामाजिक समरसता को भी बल मिलेगा और हर वर्ग को पंचायती राज में भागीदारी का समान अधिकार मिल सकेगा।
प्रशासन को भेजे गए आदेश
पंचायती राज विभाग के सचिव ने इस अधिसूचना को सभी संबंधित विभागों जैसे:
प्रधान सचिव, सचिव,
उपायुक्त,
पंचायती राज अधिकारी,
विधि विभाग आदि को भेज दिया है, ताकि यह संशोधन आगामी पंचायत चुनावों से पहले सुनिश्चित रूप से लागू किया जा सके।
पंचायती चुनावों में आरक्षण व्यवस्था में यह बदलाव स्थानीय लोकतंत्र को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे आरक्षण की जड़ता टूटेगी, अधिक से अधिक वर्गों को भागीदारी मिलेगी और राजनीतिक सशक्तिकरण का दायरा भी बढ़ेगा। अब नजर आगामी पंचायत चुनावों पर है, जहां इसका व्यवहारिक क्रियान्वयन देखा जाएगा।



