
जिला कुल्लू में भारी बारिश ने तबाही मचा दी है। लगातार बारिश और नालों के उफान के चलते मौहल खड्ड में आई बाढ़ से खेत-खलिहान पानी में डूब गए, जिससे किसानों और बागवानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। खेतों में खड़ी नकदी फसलें, टमाटर, अनार, जापानी फल और सेब की फसल पर बारिश कहर बनकर टूटी है।
बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
शनिवार रात से शुरू हुई मूसलधार बारिश ने कुल्लू के मौहल क्षेत्र समेत कई इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया। नालों में आई बाढ़ से कई घरों को नुकसान पहुंचा है, वहीं खेतों में खड़ी फसलें बह गई हैं या पानी में सड़ने लगी हैं। भूस्खलन के कारण कई जगह सड़कों पर मलबा जमा हो गया है, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया है।
सेब-टमाटर मंडियों तक नहीं पहुंचे
इन दिनों सेब सीजन अपने चरम पर है, लेकिन बारिश और सड़कों के बंद होने के कारण किसान अपनी फसल बाहरी मंडियों तक नहीं पहुंचा पाए। कई बागवानों ने फलों की तुड़ाई तो कर ली थी, लेकिन खराब मौसम और रास्ते बंद होने से उन्हें फलों को खेतों में ही छोड़ना पड़ा। टमाटर के खेत पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। इस एक दिन में ही किसानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
पर्यटक भी हुए परेशान
कुल्लू-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कई आंतरिक सड़कों पर आवाजाही ठप होने से जहां स्थानीय लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा, वहीं पर्यटन क्षेत्र भी प्रभावित हुआ। कुल्लू-मनाली आए पर्यटक बारिश और रास्ते बंद होने के कारण फंसे रह गए और उन्हें अपने गंतव्यों तक पहुंचने में परेशानी हुई।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने स्थिति को गंभीर बताते हुए अलर्ट जारी किया है। लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें। विभागीय टीमें सड़कों को बहाल करने में लगी हैं, लेकिन मौसम साफ हुए बिना राहत की उम्मीद कम है।
किसान-बागवान मायूस
स्थानीय किसानों का कहना है कि सालभर की मेहनत बारिश ने बर्बाद कर दी। अगर जल्द मौसम साफ नहीं हुआ और रास्ते नहीं खुले, तो और भी बड़ी मात्रा में फसल नष्ट हो सकती है। बागवानों ने सरकार से तत्काल राहत और मुआवजे की मांग की है।
कुल्लू में जारी भारी बारिश से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। खेतों में खड़ी फसल, बंद सड़कों से फंसी उपज, और बर्बाद होती मेहनत ने किसानों और आम लोगों की मुसीबतें कई गुना बढ़ा दी हैं। फिलहाल, सभी को मौसम साफ होने और प्रशासनिक राहत की आस है।



