
टांडा मेडिकल कॉलेज में दाखिले के समय बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, एक प्रशिक्षु डॉक्टर का सर्टिफिकेट निकला जाली
डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज (TMC), टांडा में एमबीबीएस सत्र 2025-26 के दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान एक प्रशिक्षु डॉक्टर के सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए हैं। कॉलेज प्रशासन ने इसे गंभीर मामला मानते हुए तुरंत पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा दी है।
जांच में कैसे हुआ खुलासा?
प्रवेश जांच समिति में शामिल विशेषज्ञों —
डा. राजीव गोयल (प्रोफेसर, बायोफिजिक्स)
डा. परवीन कुमार (एसोसिएट प्रोफेसर, सामुदायिक चिकित्सा)
डा. सोनिया धीमान (फार्माकोलॉजी)
डा. सत्य भूषण (बायोकैमिस्ट्री)
डा. कमल सिंह (ओबीजी)
गुरुचरण सिंह (सांख्यिकीविद, नोडल अधिकारी)
. ने जब अभ्यर्थी के दस्तावेजों की AMRU मंडी (Atal Medical & Research University) की आधिकारिक वेबसाइट पर रोल नंबर, नाम और आवेदन संख्या से पुष्टि की, तो सामने आया कि:
दाखिले के लिए प्रस्तुत सीट आबंटन पत्र AMRU से मेल नहीं खाता।
दस्तावेजों पर दर्ज नाम अश्लेष साहनी (मेरिट संख्या 108) था, जबकि दस्तावेज लड़की अभ्यर्थी ने अपने नाम पर प्रस्तुत किए थे।
सारे दस्तावेज किसी और के थे या पूरी तरह से जाली।
क्या हो सकता है बड़ा फर्जीवाड़ा?
जांच समिति ने आशंका जताई कि यह मामला व्यक्तिगत फर्जीवाड़े से अधिक हो सकता है — एक बड़े एडमिशन रैकेट की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
हालांकि, इस पर पुलिस जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।
कॉलेज प्रशासन का बयान
TMC टांडा के प्रधानाचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने कहा:
“दाखिले के समय एक अभ्यर्थी के दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं। संबंधित प्राधिकारी से पुष्टि के बाद मामला पुलिस अधीक्षक, कांगड़ा को भेज दिया गया है।”
अब आगे क्या?
पुलिस जांच शुरू हो चुकी है।
यदि यह मामला संगठित फर्जीवाड़े से जुड़ा निकला, तो कई और गिरफ्तारी हो सकती हैं।
AMRU और कॉलेज प्रशासन अब सभी दाखिलों की पुनः समीक्षा कर सकते हैं।
फर्जी अभ्यर्थियों के दाखिले रद्द होंगे और कानूनी कार्रवाई होगी।
यह क्यों है गंभीर?
मेडिकल कॉलेज में जाली दस्तावेज़ों से दाखिला न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह भविष्य में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी खतरा है।
इससे मेधावी छात्रों का हक मारा जाता है और शिक्षा व्यवस्था की साख को ठेस पहुंचती है।
टांडा मेडिकल कॉलेज में फर्जीवाड़े का ये मामला चिंताजनक है। प्रशासन की सतर्कता से समय रहते भंडाफोड़ हो गया, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि दाखिला प्रक्रिया को और मजबूत और पारदर्शी बनाना अब जरूरी है।



