
हिमाचल में लगातार बारिश से तबाही का मंजर, भूस्खलन और बादल फटने से जनजीवन अस्त-व्यस्त
हिमाचल प्रदेश में पिछले दो महीनों से जारी मूसलाधार बारिश ने भयंकर तबाही मचा दी है। भूस्खलन, बादल फटना, बाढ़ और सड़क अवरोधों के कारण आम लोगों का जीवन थम सा गया है। कई स्थानों पर घर खतरे की जद में हैं, लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
चौहार घाटी में तीन जगह फटा बादल, 245 बीघा ज़मीन बह गई
पद्धर उपमंडल की चौहार घाटी में कुगड़ी, ग्रामण, स्वाड और हुरंग गांवों में बादल फटने से भारी तबाही।
8 मकान खतरे की जद में,
दर्जनों घराट, पुलिया, फिश फार्म, और किराना दुकानें तबाह,
कुल 246 बीघा ज़मीन बह गई — जिनमें नकदी फसलें और फलदार पौधे भी शामिल हैं।
प्रशासन ने 8 परिवारों को शिफ्ट किया है। अधिकारियों ने 15 किलोमीटर पैदल चलकर राहत कार्यों का निरीक्षण किया।
सैंज में जमीन खिसकने से 12 मकानों पर खतरा
कुल्लू के सैंज क्षेत्र में शियाउगी गांव में लगातार भूस्खलन से 12 मकानों को खतरा।
दो मकान पूर्णतः ध्वस्त, बाकी लगातार गिरते मलबे से घिरे।
पहाड़ी से गिर रहा मलबा और धंसती जमीन स्थानीयों की नींद उड़ा रही है।
पौंग डैम से छोड़ा जाएगा 75,000 क्यूसेक पानी
BBMB प्रशासन पौंग डैम से 75,000 क्यूसिक पानी छोड़ने जा रहा है,
प्रशासन ने बीस नदी किनारे बसे लोगों को अलर्ट किया है, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाएगा।
पानी छोड़े जाने की प्रक्रिया धीरे-धीरे होगी, हर 12 घंटे में निकासी बढ़ेगी।
हाईवे बंद, कुल्लू-मंडी में सफर बना आफत
चंडीगढ़-मनाली हाईवे पर भारी जाम,
झलोगी टनल में 23 घंटे से सैकड़ों वाहन फंसे हुए हैं,
मंडी से कुल्लू जाने वाले वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।
एनएच-305 बंद, रोपा के पास 100 गाड़ियां फंसी, यात्रियों को भोजन मुहैया कराया गया है।
बिजली-पानी व्यवस्था ध्वस्त
कुल्लू जिले में भारी बारिश से 103 सड़कें बंद,
500 ट्रांसफार्मर ठप,
64 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त।
कई क्षेत्रों में अंधेरा और पानी की भारी किल्लत।
मकानों को भारी नुकसान
मानसून सीजन में अब तक:
8 पक्के और 2 कच्चे मकान पूरी तरह ढहे,
14 पक्के और 17 कच्चे मकान क्षतिग्रस्त।
लगवैली में पुल, श्मशान घाट और कई संपर्क सड़कें बर्बाद।
प्रशासन सतर्क, लेकिन हालात गंभीर
पुलिस, लोक निर्माण, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग मौके पर मौजूद,
भूतनाथ पुल, सरवरी नाले, औट-बंजार सड़क सहित दर्जनों स्थानों पर खतरा बरकरार।
यातायात व राहत कार्यों के लिए अतिरिक्त बल तैनात।
हिमाचल में बारिश का कहर अभी थमा नहीं है। प्राकृतिक आपदा, खस्ताहाल ढांचागत व्यवस्था और सुविधाओं का अभाव, तीनों मिलकर लोगों को गहरे संकट में डाल रहे हैं। प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है, लेकिन चुनौती बड़ी है।



