
शिमला, हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने राज्य के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के बहिष्कार का ऐलान कर दिया। भाजपा विधायक दल ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया कि पार्टी के विधायक अब सदन में न तो जगत सिंह नेगी की बात सुनेंगे और न ही उनसे कोई प्रश्न पूछेंगे।
विवाद की शुरुआत
शून्यकाल से पहले विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर और जगत सिंह नेगी के बीच तीखी बहस हुई। जयराम ठाकुर ने सरकार पर व्यवस्था तार-तार होने का आरोप लगाया था, जिसे संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान ने रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। इस बीच जगत सिंह नेगी ने जयराम सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में किन्नौर में ट्राइबल कमेटी में डीसी को बैठा दिया गया था।
इस बयान से नाराज़ होकर भाजपा विधायकों ने सदन का बहिष्कार कर दिया। विपक्ष की गैरमौजूदगी में नेगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर भी टिप्पणी की, जिससे मामला और गरमा गया।
विपक्ष का पलटवार
सदन में वापसी के बाद भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने मंत्री के बयान की निंदा करते हुए उसे सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की। उन्होंने कहा, “थुनाग की घटना को तिरंगे से जोड़ना गलत है। तिरंगा किसी को बदतमीजी की छूट नहीं देता।”
नेगी का जवाब
विवाद के बाद मीडिया से बात करते हुए राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा, “मुझे ईंट का जवाब पत्थर से देना आता है। भाजपा के नेता जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मैं उन्हें ऐसा नहीं करने दूंगा। आज जब सच्चाई सामने आने वाली थी, ये भाग गए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि थुनाग में बागवानी कॉलेज पर निर्णय को प्रभावित करने का प्रयास हुआ और विपक्ष विधानसभा अध्यक्ष की रूलिंग का भी सम्मान नहीं कर रहा है।



